
New Delhi, 7 सितंबर . उत्तर प्रदेश के सहारनपुर और Lucknow में 2013 के मुजफ्फर नगर दंगों का जिक्र करने वाले विवादित पोस्टर लगाए गए. इससे Political विवाद खड़ा हो गया है, खासकर ऐसे समय में जब सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर के अंदर एक पुरानी मस्जिद को गिराए जाने को लेकर पहले से ही तनाव बना हुआ है.
इन पोस्टरों में Samajwadi Party के प्रमुख अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ मुजफ्फर नगर दंगों का जिक्र था. पोस्टरों पर लिखा था, “न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे – 7 दिसंबर, मुजफ्फरनगर.” पोस्टर दिखने के बाद Police ने तुरंत कार्रवाई की और उन्हें उन जगहों से हटा दिया.
अब उन लोगों की पहचान करने और उन्हें खोजने के लिए तलाशी शुरू कर दी गई है जिन्होंने ये पोस्टर लगाए थे. Police आसपास के इलाकों में लगे cctv कैमरों की फुटेज की जांच कर रही है और जांच के हिस्से के तौर पर अन्य उपलब्ध सबूतों को भी देख रही है.
सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने से बात करते हुए इस हरकत की निंदा की और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिशों को सफल नहीं होने दिया जाना चाहिए.
इमरान मसूद ने कहा, “जिन लोगों ने ये पोस्टर लगाए हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. कुछ लोग माहौल खराब करना चाहते हैं, लेकिन हम किसी भी कीमत पर माहौल खराब नहीं होने देंगे. हम अपने शहर की पहचान बनाए रखना चाहते हैं. यह प्यार का शहर है, नफरत का नहीं.”
इन पोस्टरों के सामने आने से सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद गिराए जाने के विवाद को और हवा मिल गई है. विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा की अगुवाई वाली राज्य Government सांप्रदायिक राजनीति को बढ़ावा दे रही है और एक खास समुदाय के खिलाफ टारगेटेड कार्रवाई कर रही है.
यह तोड़-फोड़ उस ढांचे और उस जमीन की स्थिति को लेकर हुए कानूनी विवाद के बाद की गई, जिस पर वह ढांचा बना था. बजरंग दल के क्षेत्रीय संयोजक विकास त्यागी ने सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर कर दावा किया था कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बना है.
16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने निर्माण को अवैध घोषित किया और बेदखली व ध्वस्तीकरण के साथ 6.41 करोड़ से अधिक की क्षतिपूर्ति (जुर्माना) भरने का आदेश दिया.
इसके बाद मुस्लिम पक्ष ने इस आदेश को जिला जज की अदालत में चुनौती दी. 2 सितंबर को जिला जज ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी और प्रशासनिक आदेश को सही ठहराया.
अदालत का फैसला आने के बाद 5 सितंबर 2026 की सुबह प्रशासन ने भारी Police बल की तैनाती के बीच बुलडोजर चलाकर इस ढांचे को हटा दिया.
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पीआईएम/
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