
नोएडा, 22 अक्टूबर . शहर में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) ने सख्त रुख अपनाया है. प्रदूषण फैलाने और निर्धारित नियमों की अनदेखी करने वाली निर्माण कंपनियों, परियोजनाओं तथा अन्य जिम्मेदार इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है. बोर्ड की ओर से अक्टूबर महीने में अब तक करीब 75 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है. इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाली कुछ कंपनियों के खिलाफ भारी जुर्माने की संस्तुति भी की गई है. प्रदूषण नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे इस अभियान में नोएडा प्राधिकरण के ठेकेदारों पर भी कार्रवाई की गई है.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्रवाई से निर्माण कार्यों में पर्यावरण संबंधी नियमों की अनदेखी करने वाली इकाइयों में हड़कंप मचा हुआ है. हालांकि, जुर्माने और कार्रवाई के बावजूद शहर में कई स्थानों पर प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियां जारी रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं. यूपीपीसीबी की कार्रवाई के तहत नोएडा स्थित आइवरी काउंटी पर 50 लाख रुपये के जुर्माने की संस्तुति की गई है. वहीं, सेक्टर-150 में ऐस इन्फ्रासिटी डेवलपर प्राइवेट लिमिटेड पर 10 लाख रुपए के जुर्माने की संस्तुति की गई है. इन कार्रवाईयों का उद्देश्य निर्माण गतिविधियों के दौरान प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित कराना है.
इसके साथ ही नोएडा प्राधिकरण के ठेकेदारों पर भी नियमों की अनदेखी करने के मामले में जुर्माना लगाया गया है. बोर्ड का फोकस उन निर्माण स्थलों और परियोजनाओं पर है, जहां धूल उड़ने, निर्माण सामग्री के उचित प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पालन नहीं किए जाने से आसपास के क्षेत्रों की हवा प्रभावित होने की आशंका है. शहर में प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारणों में पुस्ता रोड पर संचालित हॉट मिक्सचर प्लांट और रेडी मिक्स कंक्रीट (आरएमसी) प्लांट को भी माना जा रहा है.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में 20 से अधिक आरएमसी और हॉट मिक्सचर प्लांट संचालित हैं. इनमें से कई प्लांट के अवैध रूप से संचालित होने की बात सामने आई है. हॉट मिक्सचर प्लांट में सड़क निर्माण के लिए सामग्री तैयार की जाती है, जबकि आरएमसी प्लांट में कंक्रीट तैयार होता है. इन इकाइयों में निर्धारित पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं होने पर धूल, धुआं और अन्य प्रदूषक हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं. ऐसे में इन प्लांटों के संचालन, प्रदूषण नियंत्रण के इंतजाम और आवश्यक अनुमतियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, विभिन्न मामलों में अब तक करीब 1 करोड़ 28 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है. इसके बावजूद कई आरएमसी और हॉट मिक्सचर प्लांटों का संचालन धड़ल्ले से जारी रहने की बात कही जा रही है. इससे प्रदूषण नियंत्रण की कार्रवाई और उसके प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं. बोर्ड की ओर से अब ऐसे मामलों में केवल आर्थिक दंड तक सीमित न रहकर कानूनी कार्रवाई की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं.
अधिकारियों ने संबंधित मामलों में विशेष न्यायालय (स्पेशल कोर्ट) में प्राथमिकी (First Information Report ) दर्ज कराने की संस्तुति भी की है. इससे नियमों का लगातार उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की संभावना है. नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता खराब होने के बीच यूपीपीसीबी की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. निर्माण स्थलों, औद्योगिक इकाइयों और प्लांटों में प्रदूषण नियंत्रण के मानकों का पालन कराना बड़ी चुनौती बना हुआ है.
जुर्माना लगाने के साथ-साथ अवैध रूप से संचालित इकाइयों की जांच और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई जरूरी है.
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पीकेटी/डीकेपी
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