
उत्तराखंड, 29 सितंबर . उत्तराखंड की हरी-भरी वादियों और शांत वातारण के बीच, नैनीताल जिले के रामनगर में स्थित श्री हनुमान धाम आस्था और विश्वास का प्रतीक है. यह मंदिर एक ऐसा दिव्य स्थल है, जहां मन को असीम शांति और ऊर्ता का अनुभव होता है. इस धाम में बजरंगबली के नौ स्वरूप और उनकी 12 पावन लीलाओं के दर्शन एक साथ होते हैं.
घने जंगलों, कल-कल बहती नदियों और पहाड़ों से घिरा यह धाम, भक्तों को बजरंग बली के और करीब होने का एहसास कराता है. मान्यता है कि यहां सच्चे दिल से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. Tuesday और Saturday को यहां भक्तों का तांता लगा रहता है और राम भक्त हनुमान जी के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठता है. प्रकृति की गोद में बसा यह पवित्र धाम, धर्म, भक्ति और सुकून का संगम है, जो हर आने वाले को अपनी ओर खींच लेता है.
उत्तराखंड के Chief Minister पुष्कर सिंह धामी ने भी मंदिर के लिए एक खास पोस्ट शेयर की. उन्होंने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर मंदिर का खास वीडियो पोस्ट कर लिखा, “नैनीताल के रामनगर की पवित्र धरती पर बसा श्री हनुमान धाम आस्था, भक्ति और आध्यात्मिक अनुभव की एक शानदार जगह है. यहां हनुमान के दिव्य रूप भक्तों को गहरा आध्यात्मिक अनुभव देते हैं. नैनीताल जिले में आने पर इस पवित्र जगह पर जरूर जाएं.”
यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां एक साथ बजरंगबली के 9 स्वरूपों और उनकी 12 पावन लीलाओं (कुल 21 रूपों) के दर्शन होते हैं. यहां मां अंजनी के साथ हनुमान जी का बाल स्वरूप, श्रीराम के चरणों में दास स्वरूप, पंचमुखी हनुमान, संजीवनी हनुमान, पराक्रमी हनुमान और अपने हृदय में राम-सीता को बसाए हुए हनुमान जी के दिव्य रूपों के दर्शन होते हैं.
हनुमान धाम को एक ‘इच्छापूर्ति धाम’ माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं एक कागज पर लिखकर भगवान के चरणों में अर्पित करते हैं या मन्नत की चुनरी और ध्वजा बांधते हैं, जिससे बजरंग बली उनकी सभी मन्नतें पूरी करते हैं. इसे कुमाऊं क्षेत्र का ‘पांचवां धाम’ भी कहा जाने लगा है. मंदिर का मुख्य धनुषाकार प्रवेश द्वार दो मछलियों की आकृतियों से सुसज्जित है, जिन्हें समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है.
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एनएस/पीएम
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