नेपाल में बाढ़ से तबाही के बीच चीन में भूकंप, सिचुआन में 5.1 तीव्रता के झटके, 47 ग्लेशियर झीलों पर बढ़ा खतरा

नई दिल्‍ली, 28 अगस्त . चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत में Friday को भूकंप के झटके महसूस क‍िए गए. लोंगचांग शहर में दोपहर 1:13 बजे 5.1 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया. भूकंप की गहराई लगभग 13 किमी थी. फिलहाल नुकसान या हताहत की कोई जानकारी नहीं है.

चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर (सीईएनसी) के अनुसार, चीन के दक्षिण-पश्चिमी सिचुआन प्रांत के लोंगचांग शहर में Friday दोपहर 1:13 बजे (बीजिंग समय) 5.1 तीव्रता का भूकंप आया.

सीईएनसी की ओर से जारी जानकारी के हवाले से ‘चाइना डेली’ ने बताया क‍ि भूकंप का केंद्र 29.23 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 105.22 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किया गया. सीईएनसी के अनुसार, यह भूकंप 13 किलोमीटर की गहराई पर आया. फिलहाल भूकंप से हुए नुकसान या किसी हताहत की तत्काल जानकारी सामने नहीं आई है.

ये घटना ऐसे समय हो रही है जब चीन के पड़ोसी देश नेपाल में बाढ़ के कारण भारी तबाही मची हुई है. इस जल आपदा का कुछ असर चीन में भी हुआ है. ऐसे में भूकंप की दस्‍तक ने लोगों की च‍िंता बढ़ा दी है.

इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (आईसीआईएमओडी) और नेपाल Government के वैज्ञानिक आकलनों के अनुसार, 47 ग्लेशियल झीलों को ‘संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झीलें’ (पीडीजीएलएस) के रूप में चिन्हित किया गया है. चेतावनी दी गई है कि इन झीलों से कभी भी ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लोफ) आ सकता है, जो नेपाल की नदी प्रणालियों में विनाशकारी बाढ़ का कारण बन सकता है. ऐसे में भूकंप तबाही का एक बड़ा कारण बन सकता है.

इन 47 झीलों में से 21 नेपाल में स्थित हैं, जबकि 25 झीलें तिब्बत में हैं और सीमा पार की श्रेणी में आती हैं. ये झीलें उन नदियों के ऊपरी हिस्से में स्थित हैं जो दक्षिण की ओर बहते हुए नेपाल में प्रवेश करती हैं, इसलिए ये नीचे बसे समुदायों और बुनियादी ढांचे के लिए संभावित खतरा पैदा करती हैं.

नेपाल के भोटेकोसी नदी में 26 अगस्‍त को आई विनाशकारी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं. यह बाढ़ तब आई जब भोटेकोसी नदी की सहायक नदी ‘ल्हेन्डे’ का प्रवाह एक हिमस्खलन के कारण रुक गया. इसके बाद सबसे पहले नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी क्षेत्र में स्थित तिमुरे गांव प्रभावित हुआ.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इलाके में बारिश नहीं हुई थी, इसलिए लोगों को इस आपदा के आने का कोई अंदाजा नहीं था. बाढ़ आने के समय लोग अपनी रोजमर्रा की गतिविधियों में लगे हुए थे.

एवाई/पीएम