
काठमांडू, 1 सितंबर . नेपाल में हालिया विनाशकारी बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है. इस बीच नेपाल में India के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि India की सुरंग बचाव (टनल रेस्क्यू) टीम नेपाली सेना के साथ मिलकर रसुवा जिले के चिलिमे क्षेत्र में फंसे लोगों की तलाश में लगातार काम कर रही है.
राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने social media मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि भारतीय टीम ने बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपना अभियान जारी रखा है. उन्होंने बताया कि सुरंग के भीतर सीमित जगह, चुनौतीपूर्ण भू-भाग और दलदल जैसी स्थिति होने के बावजूद बचाव दल ने अस्थायी फ्लोट्स (तैरने वाले उपकरणों) का इस्तेमाल कर सुरंग के अंदर गहराई तक पहुंचने का प्रयास किया. उन्होंने कहा कि टीम Wednesday को भी अपना अभियान जारी रखेगी और सुरंग में फंसे किसी भी व्यक्ति को बचाने की कोशिश करेगी.
दूसरी ओर, नेपाल में बाढ़ से प्रभावित और लापता लोगों की पहचान के लिए India की 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम भी काम कर रही है. भारतीय टीम ने नेपाल Police सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी और काठमांडू घाटी के खुमलटार स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी में नेपाली विशेषज्ञों के साथ डीएनए नमूनों का विश्लेषण शुरू कर दिया है.
भारतीय दूतावास के अनुसार, यह टीम बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से एकत्र किए गए डीएनए नमूनों की जांच में नेपाल की मदद कर रही है, ताकि मृतकों और लापता लोगों की पहचान जल्द की जा सके.
नेपाल Police के मुताबिक, Tuesday शाम तक बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से 1,068 शव बरामद किए जा चुके हैं. इनमें से 400 शवों के केवल आंशिक अवशेष मिले हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा है. अधिकारियों ने बताया कि कई शवों की पहचान नहीं हो पाने के कारण डीएनए नमूने सुरक्षित रखे जा रहे हैं.
Police के अनुसार अभी भी 4,606 लोग लापता हैं, जिनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.
नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिलों में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्रों के जलविद्युत परियोजना स्थलों पर भी कई लोगों के लापता होने की सूचना है. इन क्षेत्रों में खोज और बचाव कार्यों के लिए नेपाल Government के अनुरोध पर India और चीन ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीमें भेजी हैं.
इस बीच नेपाल के Prime Minister बलेंद्र शाह ने कहा है कि बाढ़ में जान गंवाने वाले और अब तक पहचान नहीं हो सके लोगों के शवों का कानून और वैज्ञानिक प्रक्रियाओं के अनुसार प्रबंधन किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि डीएनए नमूनों और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखते हुए नेपाली सेना, नेपाल Police और सशस्त्र Police बल की सहायता से शवों का अंतिम प्रबंधन किया जा रहा है, जबकि जिनकी पहचान हो चुकी है, उनके शव परिजनों को सौंपे जा रहे हैं.
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एएमटी/डीकेपी
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