नेपाल त्रासदी : आपदा में भारतीय भी फंसे, 68 साल की अनीता दास समेत कई लापता, परिवारों में मचा हाहाकार

New Delhi, 27 अगस्त . नेपाल में आई भीषण आपदा ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई भारतीय श्रद्धालुओं को संकट में डाल दिया है. पश्चिम बंगाल की 68 साल की अनीता दास और 63 साल की रंजीत हलधर समेत कई श्रद्धालु तिब्बत-नेपाल बॉर्डर के पास लापता हो गए हैं.

Bhopal की देविका अधिकारी के परिवार के 29 सदस्य भी बाढ़ में फंसे हैं, जिन्होंने आखिरी फोन कॉल में घर की छत पर फंसे होने और बचने की उम्मीद कम होने की बात कही थी. भारतीय गोरखा एकता संघ के अनुसार, लगभग 300-400 भारतीय नागरिक अभी भी फंसे हुए हैं.

68 साल की अनीता दास नेपाल में आई भयानक आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान लापता हो गई. उनका परिवार और Police उन्हें ढूंढने और उनकी सुरक्षा की पुष्टि करने की कोशिश कर रहे हैं.

अनीता दास के परिवार की सदस्य निकिता दास ने कहा, “हमारी जेठानी 21 अगस्त को अकेले मानसरोवर यात्रा पर गई थीं. कैलाश मानसरोवर के दर्शन करने की उनकी इच्छा थी. मिथिला एक्सप्रेस से उन्होंने यात्रा की. Tuesday को उनके बेटे की बात हुई थी और बताया था कि 3-4 घंटे का अभी रास्ता बाकी है, लेकिन 10 बजे ये घटना घट गई. हमने संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन स्विच ऑफ बता रहा है. जिस कंपनी के जरिए वो गई थीं, उसके प्रमुख ने कहा कि जहां पर ये घटना घटी है, Wednesday सुबह आठ बजे तक उनकी टीम उसी स्थान पर थी. Police हमारे घर आई थी, और फोन नंबर दिया है, और कहा है कि कोई जानकारी मिले तो सूचित किया जाए.”

निर्मल इंदू दास ने कहा, “Police हमारे घर Thursday की सुबह आई थी और जानकारी दी कि अनिता दास लापता हैं. Wednesday सुबह आठ बजे जब बात हुई थी, तो उन्होंने बताया था कि हमारी टीम तिब्बत बॉर्डर के पास रूक रही है. उसके बाद कोई बात नहीं हुई. वो कंपनी के जरिए अकेले गई थीं.”

वहीं, पश्चिम बंगाल के 63 साल के रंजीत हलधर की बेटी सुनंदा ने कहा कि उनके पिता एक टूरिस्ट ग्रुप के साथ नेपाल में हुए हादसे के बाद से लापता हैं. उन्होंने Government से पिता को जल्द से जल्द बचाने की अपील की और कहा, “मेरे पिता लापता हैं. Wednesday सुबह से कोई संपर्क नहीं हुआ. दोपहर के बाद हमें पता चला कि इस तरह की स्थिति है. न्यूज में हमने देखा. वो देखने के बाद हमें एहसास हुआ और हमने उसके बाद पापा से संपर्क करने की कोशिश की. कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है.”

उन्होंने आगे कहा कि नेपाल Government की तरफ से तो कोई संपर्क नहीं हुआ है, जो हेल्पलाइन नंबर है, उसमें से कुछ पर संपर्क किया है, वो यही कह रहे हैं कि रेस्क्यू ऑपरेशन चालू है, कुछ लोग मिल रहे हैं, शेल्टर होम में हैं, लेकिन पहचान नहीं बता रहे हैं. Government से यही अपील करूंगी कि जल्द से जल्द रेस्क्यू ऑपरेशन करके सबको बचाया जाए.

Bhopal की देविका अधिकारी का संपर्क उनके परिवार के चार सदस्यों, कृष्णा खनाल, राधिका खनाल, रामचंद्र खनाल और भवती खनाल से नहीं हो पा रहा है. देविका अधिकारी ने कहा कि बस इतनी बात हुई कि जान बचाने के लिए वो पहाड़ों पर चढ़ रहे थे. ऊपर चढ़ते समय उन्हें किसी का घर मिल गया, उस घर की छत पर वो गए और फोन किया कि हमलोग बचने वाले नहीं हैं. हम किसी की छत पर हैं, घर भी आधा डूब चुका है. अब हमारा बचना भी मुश्किल है. अभी हम Government से किसी तरह की कोई बात नहीं कर पाए हैं. 29 लोग सभी हमारे परिचय के हैं, हमारे रिश्तेदार हैं. किसी से संपर्क नहीं हो पा रहा है.

लोकमणि ने कहा, “शाम को मुझे पता चला कि देविका अधिकारी के परिवार के साथ भी ऐसा हो गया है. इसलिए हम यहां आए हैं. यहां आए तो पता चला कि इनके 28-29 लोग गए थे, जहां उन्हें खाना खाने के लिए रुकना था, खाना खाते समय ऐलान हो गया कि बाढ़ आ रही है, यहां से भाग जाइए. बस वहीं छोड़कर लोग ऊपर की ओर भागे, और एक घर में ठिकाना लिया. लोगों को लगा कि यहां पानी नहीं आएगा, लेकिन पानी ने घर लिया.”

भारतीय गोरखा एकता संघ के सदस्य ध्रुव प्रधान ने इस संकट और फंसे हुए भारतीय नागरिकों की मौजूदगी को लेकर कहा, “यह एक प्राकृतिक आपदा है. जो भी हुआ, वो अचानक ही हुआ. जो लोग मुख्य घटनास्थल के आसपास थे, उन्हें अलर्ट देने का मौका नहीं मिला. जानमाल का काफी नुकसान हुआ. वहां पर मेरे कुछ रिश्तेदार हैं, उनसे बात हुई है. अनुमान के अनुसार हमारे 300-400 भारतीय नागरिक भी वहां पर फंसे हुए हैं. आंकड़ा तो बताया नहीं जा सकता है, लेकिन जो नुकसान हुआ, वो बहुत ज्यादा है.”

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