नेपाल आपदा: अब तक 166 भारतीयों का रेस्क्यू, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 410 भारतीय चीन से लौटे

New Delhi, 2 सितंबर . नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद India का राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है. विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें Wednesday को बचाए गए तीन लोग भी शामिल हैं. वहीं, कैलाश मानसरोवर यात्रा और अन्य गतिविधियों के लिए तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र गए 410 भारतीय नागरिक Wednesday को चीन से रवाना हो गए.

India ने Wednesday को राहत सामग्री की पांचवीं खेप नेपाल भेजी. भारतीय वायुसेना का एक विमान काठमांडू पहुंचा, जिसमें करीब 5.5 टन चिकित्सा सामग्री भेजी गई. इसमें एंटीबायोटिक्स, दर्द निवारक दवाएं, सर्जिकल उपकरण और अन्य आवश्यक दवाएं शामिल हैं.

इसके साथ ही विमान में 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और छह टन से अधिक आधुनिक रेस्क्यू उपकरण भी भेजे गए. India अब तक नेपाल को लगभग 74 टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है.

विदेश मंत्रालय ने बताया कि India के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने राहत सामग्री नेपाल Government को सौंपी. यह सहायता 26 अगस्त को तिब्बत में ग्लेशियर ध्वस्त होने के बाद आई भीषण फ्लैश फ्लड से प्रभावित इलाकों में राहत कार्यों के लिए दी गई है.

भारतीय सुरंग बचाव दल ने अपना बेस त्रिशूली से स्याब्रुबेसी स्थानांतरित कर दिया है, जिससे चिलीमे सुरंग तक पहुंचने में कम समय लगेगा. नेपाली सेना के साथ संयुक्त अभियान के दौरान दल ने कीचड़ और मलबे से भरी सुरंग में लगभग 100 मीटर आगे तक पहुंचने में सफलता हासिल की.

एमईए ने बताया कि भारी मशीनरी पहुंचाने के लिए सुरंग तक अस्थायी सड़क बनाने की संभावना भी तलाश की जा रही है. Wednesday को India से पहुंचे 11 विशेषज्ञ त्रिशूली बाजार के पास पहुंच चुके हैं और Thursday से नेपाली सेना के साथ अभियान में शामिल होंगे.

भारतीय फॉरेंसिक टीम काठमांडू की दो प्रयोगशालाओं में नेपाली विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जांच और पहचान का काम कर रही है.

नेपाल की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, Wednesday सुबह तक बाढ़ में बहकर गए 1,114 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 3,916 लोग अब भी लापता हैं.

नेपाल के Prime Minister बलेंद्र शाह ने संसद में कहा कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से बढ़ते खतरों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि यह आपदा नेपाल के भविष्य और जलवायु संकट को लेकर कई बड़े सवाल खड़े करती है.

विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास लेंगदे खोला पर हिमस्खलन से प्राकृतिक बांध बन गया था. बाद में यह बांध टूटने से भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ आई, जिसने त्रिशूली नदी तक के क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई.

डीएससी