निलंबित आईएएस अधिकारी की रायसेन कलेक्टर के रूप में नियुक्ति से मध्य प्रदेश में विवाद उपजा

Bhopal , 14 अक्टूबर . Madhya Pradesh Government द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी रोहित सिसोदिया को रायसेन कलेक्टर नियुक्त करने के फैसले ने Political विवाद को जन्म दिया है. इंदौर जल प्रदूषण त्रासदी में 36 लोगों की जान चली गई थी, जिसमें कथित प्रशासनिक चूक के आरोप में उन्हें निलंबित किए जाने के कुछ महीने बाद यह नियुक्ति की गई है. कांग्रेस ने इस कदम पर सवाल उठाए हैं.

यह नियुक्ति राज्य Government द्वारा Tuesday देर रात किए गए एक बड़े प्रशासनिक फेरबदल का हिस्सा थी. Government ने इस क्रम में 23 से अधिक आईएएस अधिकारियों के तबादले किए हैं, जिसमें कुछ नए कार्यभार भी शामिल हैं.

Madhya Pradesh कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने Wednesday को सिसोदिया की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भागीरथपुरा त्रासदी से प्रभावित परिवार अभी भी न्याय और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं.

social media प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में पटवारी ने सवाल किया कि जांच आयोग की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की गई है और किन कारणों से सिसोदिया को रायसेन कलेक्टर नियुक्त किया गया है.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक नियुक्तियों में जवाबदेही की तुलना में Political संबंधों और भाई-भतीजावाद को प्राथमिकता दी जा रही है.

उन्होंने Chief Minister मोहन यादव से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग करते हुए पूछा, “क्या अब तबादलों का उद्योग तबादलों की फैक्ट्री बन गया है?”

भागीरथपुरा जल प्रदूषण त्रासदी के समय सिसोदिया इंदौर नगर निगम के अतिरिक्त आयुक्त के पद पर कार्यरत थे.

घटना से संबंधित कथित प्रशासनिक चूक के आरोप में उन्हें 1 जनवरी को निलंबित कर दिया गया था.

निलंबन की घोषणा करते हुए Chief Minister मोहन यादव ने इसे भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राज्य Government की कड़ी कार्रवाई बताया था.

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने यह भी दावा किया था कि Madhya Pradesh में पहली बार किसी आईएएस अधिकारी को निलंबित किया गया है.

रायसेन कलेक्टर के रूप में सिसोदिया की नियुक्ति पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि त्रासदी के बाद इतना कड़ा रुख अपनाने के बावजूद राज्य Government ने उन्हें इतनी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी क्यों सौंपी है.

दूषित पेयजल की आपूर्ति से जुड़ी भागीरथपुरा घटना में 36 लोगों की जान चली गई और पेयजल सुरक्षा तथा नगर प्रशासन के कामकाज पर सवाल खड़े हो गए.

इस फेरबदल में जबलपुर, नर्मदापुरम, भिंड, पन्ना, शाजापुर, बुरहानपुर, हरदा, बालाघाट और सिंगरौली के कलेक्टरों के तबादलों में भी बदलाव किए गए हैं, साथ ही राज्य सचिवालय में कई वरिष्ठ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं.

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एमएस/