नितेश राणे को विवादित बयान नहीं देना चाहिए, फडणवीस लगाएं लगाम : सिराज अहमद खान

Mumbai , 20 अक्टूबर . जमीयत उलेमा-ए-हिंद Mumbai के अध्यक्ष मौलाना सिराज अहमद खान ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के विरोध प्रदर्शनों को लेकर दिए गए बयान और Maharashtra के मंत्री नितेश राणे की ‘आई लव मोहम्मद’ पर टिप्पणी की आलोचना की.

उन्होंने कहा कि India का संविधान प्रत्येक नागरिक को अपने विचार रखने, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है. मौलाना ने Government से विरोध करने वाले लोगों के साथ बातचीत कर समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की.

मोहन भागवत के बयान पर मौलाना सिराज अहमद खान ने कहा कि उन्हें इस तरह का बयान नहीं देना चाहिए था. भारतीय संविधान नागरिकों को अपने अधिकारों के तहत विरोध-प्रदर्शन करने की स्वतंत्रता देता है. यदि कोई व्यक्ति किसी बात से नाराज है या उसे लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो उसे अपनी बात रखने का अधिकार है.

मौलाना ने कहा कि विरोध करना अपने आप में Government के खिलाफ होना नहीं है. जब लोगों के साथ अन्याय होता है, तो वे अपनी आवाज उठाते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि Governmentें अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए आंदोलनों को बांग्लादेश या फ्रांस में हो रही घटनाओं से जोड़ने और उन्हें अलग रंग देने की कोशिश करती हैं. यदि युवाओं के विरोध के दौरान उनसे बातचीत की जाती और उनकी समस्याओं को बातचीत की मेज पर सुलझाने का प्रयास होता, तो हालात इतने खराब नहीं होते.

सत्ता परिवर्तन यानी ‘रिजीम चेंज’ की चर्चा पर मौलाना सिराज ने कहा कि विरोध करने वालों की मांगों को अलग नजरिये से देखने के बजाय Government को उनसे बातचीत करनी चाहिए. सभी पक्ष एक साथ बैठकर चर्चा करें, तो समस्याओं का समाधान निकाला जा सकता है. उन्होंने Government से अपील की कि प्रदर्शनकारियों की आवाज सुनने और उनकी शिकायतों को समझने की कोशिश की जाए, न कि आंदोलन को किसी दूसरे मुद्दे से जोड़कर पेश किया जाए.

नितेश राणे के ‘आई लव मोहम्मद’ संबंधी बयान पर मौलाना ने कहा कि ऐसे बयानों को जरूरत से ज्यादा महत्व नहीं दिया जाना चाहिए. आजादी की लड़ाई में मुसलमानों का भी योगदान रहा है और देश किसी एक व्यक्ति या समुदाय की जागीर नहीं है. India उन सभी नागरिकों का वतन है, जो इससे मोहब्बत करते हैं. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में रहने वाले हर व्यक्ति को संविधान के तहत अधिकार प्राप्त हैं और धार्मिक आधार पर किसी को देश से बेदखल करने की बात करना संवैधानिक भावना के विपरीत है.

उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को अपने-अपने धार्मिक अधिकारों और परंपराओं के अनुसार जीवन जीने की स्वतंत्रता है. साथ ही, हर समुदाय को अपनी सीमाओं और जिम्मेदारियों का ध्यान रखना चाहिए. उन्होंने Maharashtra के Chief Minister देवेंद्र फडणवीस से नितेश राणे के बयानों पर लगाम लगाने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे विवादित बयान सामने आने पर Chief Minister को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए. अपने वतन से मोहब्बत करना गर्व की बात है और किसी के धर्म के आधार पर उसके अधिकारों पर सवाल नहीं उठाए जाने चाहिए.

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/एबीएम