
नासिक, 29 अक्टूबर . नासिक में 31 अक्टूबर को President द्रौपदी मुर्मू के करकमलों से होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर तैयारियां तेज हैं. अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज ने बताया कि 30-31 अक्टूबर और 1 नवंबर तक तीन दिवसीय कार्यक्रम प्रशासन द्वारा आयोजित किया गया है. उन्होंने बताया कि आयोजन में साढ़े पांच सौ लोगों का शंखनाद और साढ़े छह हजार आदिवासी बंधुओं की भव्य दिव्य आरती विशेष आकर्षण होगी. जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य जी ने कहा कि कुंभ के इतिहास में पहली बार President द्रौपदी मुर्मु का आगमन हर्ष और गौरव का विषय है.
अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता भक्ति चरण दास महाराज ने कहा, “ध्वजारोहण 31 अक्टूबर को होने जा रहा है. 30-31 अक्टूबर और 1 नवंबर तक तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन हमारे पूरे सिंहस्थ के प्राधिकरण, महानगर पालिका और प्रशासन द्वारा किया गया है. मैं सर्वप्रथम सभी आमंत्रित अतिथियों, महापुरुषों और अखाड़ों का धन्यवाद देता हूं कि वे प्रशासन के निमंत्रण पर नासिक आए हैं.”
उन्होंने कहा कि दूसरी बात, President के करकमलों द्वारा यह ध्वजारोहण होने जा रहा है. यह नासिक और Maharashtra के लिए गर्व और गौरव की बात है. साथ ही, महिलाओं को किस प्रकार सम्मान दिया जाता है और संतों-महापुरुषों द्वारा उनका सम्मान कैसे किया जाता है, यह भी इस कार्यक्रम में देखने को मिलेगा.
भक्ति चरण दास महाराज ने कहा कि President एक महिला हैं, हमारे Maharashtra के उपChief Minister पद पर भी महिला हैं, नासिक की प्रथम नागरिक महापौर भी महिला हैं और नासिक महानगरपालिका की आयुक्त भी महिला हैं. यह पूरा नियोजन कहीं न कहीं देश की President के मान-सम्मान को ध्यान में रखकर किया गया है. उनके करकमलों से ध्वजारोहण होना पूरे समाज और नासिक के लिए गौरव का विषय है.
उन्होंने कहा कि प्रशासन पूरी शक्ति के साथ तैयारियों में जुटा हुआ है और यह कार्यक्रम विश्वप्रसिद्ध होने जा रहा है. नासिक, Maharashtra और पूरा विश्व इस आयोजन को Thursday को देखेगा. इसमें दो ऐसे कार्यक्रम होंगे जो विशेष आकर्षण का केंद्र बनेंगे. पहला, लगभग साढ़े पांच सौ लोगों का शंखनाद और दूसरा, लगभग साढ़े छह हजार आदिवासी बंधुओं द्वारा एक साथ भव्य दिव्य आरती.
भक्ति चरण दास महाराज ने कहा कि ऐसे अनेक लोग हैं जिन्होंने कभी रामकुंड नहीं देखा होगा या गोदावरी कुंभ के बारे में अधिक नहीं जानते होंगे. उनके लिए भी यह एक ऐतिहासिक अवसर होगा. रामतीर्थ सेवा समिति और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से यह भव्य आयोजन संपन्न होने जा रहा है. यह क्षण नासिक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्षों से एक परंपरा बनी हुई थी कि त्र्यंबकेश्वर वाले नासिक नहीं जाते और नासिक वाले त्र्यंबकेश्वर नहीं जाते. हम इस भेदभाव को समाप्त करते हुए 13 अखाड़ों के सभी श्रीमहंतों, शंकराचार्यों, रामानंदाचार्यों और वैष्णवाचार्यों को एक मंच पर लेकर आ रहे हैं. President की उपस्थिति में यह भव्य दिव्य आरती, गोदावरी की भजन-संध्या और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से हम संत समाज और पूरे विश्व को एक सकारात्मक संदेश देना चाहते हैं. प्रशासन की ओर से मेलाधिकारी शेखर सिंह, मनीषा खत्री, गिराम साहब, गिरीश महाजन और अन्य अधिकारी इस कार्यक्रम की तैयारियों में निरंतर जुटे हुए हैं. उनके सहयोग और समर्पण से यह आयोजन सफल होगा.
उन्होंने कहा कि हमें विश्वास है कि आने वाला सिंहस्थ अत्यंत दिव्य और भव्य होगा. इसी आशा और विश्वास के साथ हमने सभी देवी-देवताओं, संतों, महंतों और श्रद्धालुओं को इस कार्यक्रम के लिए निमंत्रित किया है और उनका स्वागत और आह्वान किया है.
ध्वजारोहण कार्यक्रम के लिए President द्रौपदी मुर्मु के आगमन को लेकर जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने कहा कि हमें बहुत खुशी है कि नासिक कुंभ के इतिहास में पहली बार President पधार रही हैं. यह अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है. साधु-संतों की उपस्थिति में President के करकमलों से पूर्व वैदिक संकल्प के ध्वजारोहण का कार्यक्रम संपन्न होने जा रहा है. इतिहास में यह एक अत्यंत गौरवशाली क्षण होगा.
उन्होंने कहा कि हमें प्रसन्नता है कि इस अवसर पर समस्त हिंदू संगठन एकत्रित हो रहे हैं. यह अत्यंत आनंद और गौरव की बात है. 13 अखाड़ों के श्रीमहंत, आचार्य और संत-महात्मा एक साथ आकर आरती कर रहे हैं. यह दृश्य अत्यंत गौरवान्वित करने वाला है और सनातन परंपरा की एकता का प्रतीक है.
जगद्गुरु श्रीमद् रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी महाराज ने कहा कि यह हमारी भारतीय संस्कृति की भव्य झलक होगी. भारतीय संस्कृति के अनेक आयाम इस शोभायात्रा में देखने को मिलेंगे. समाज में पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति जागरण, विज्ञान और अध्यात्म का संदेश दिया जाएगा. विभिन्न झांकियों, कलापथकों और चित्ररथों के माध्यम से लोगों को प्रेरणा मिलेगी.
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पीएम
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