
Mumbai /पश्चिम मेदिनीपुर, 6 सितंबर . विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीराज नायर ने फिल्मों के जरिए धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने पर कड़ा ऐतराज जताया है. साथ ही उन्होंने Maharashtra में नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा और डांडिया कार्यक्रमों के लिए जारी सुरक्षा दिशानिर्देशों का समर्थन किया है.
Mumbai में से बात करते हुए श्रीराज नायर ने कहा, “यह बेहतर होगा कि हुसैन दलवई, असीम वकार और अन्य मुस्लिम नेता, जिनकी सोच मुझे जिहादी लगती है, हिंदू देवी-देवताओं, हिंदू संतों और हिंदू ऐतिहासिक हस्तियों के बारे में बयान देने से बचें. अगर उन्हें अपने धर्म के बारे में कुछ कहना है तो उन्हें अपनी ही कम्युनिटी के भीतर बात करनी चाहिए.”
उन्होंने कहा कि हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों, मान्यताओं, संतों, पूजा-पद्धति और परंपराओं का अपना महत्व है, जिसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी शामिल है. अगर कुरीतियों पर बात करनी है तो वह अपने समाज के बारे में चर्चा करें. एक फिल्म को लेकर हमारे धर्म पर टिप्पणी करना ठीक नहीं है. राजनीति करनी है तो अपने ढंग से करें, हिंदू धर्म के बारे में टिप्पणी न करें.
नीम करौली बाबा पर बन रही फिल्म को लेकर चल रहे विवाद पर नायर ने कहा, “Government के पास बहुत काम है. India Government 140 करोड़ लोगों के लिए काम करती है. देश कैसे बढ़े, सुरक्षा, आर्थिक वृद्धि और विदेश नीति जैसे विषयों पर Government काम करती है. फिल्में बनाना Government का काम नहीं है. मैं खुद बाबा के उपासक हूं और उनके दर्शन किया है, जहां अलग ऊर्जा महसूस हुई. देश-दुनिया में उनके हजारों श्रद्धालु हैं जो श्रद्धा से वहां जाते हैं. तुष्टिकरण की राजनीति करने वाले लोगों को हमारी श्रद्धा पर नहीं बोलना चाहिए. सिर्फ एक मजहब के लोगों को खुश करने और वोटबैंक के लिए बयानबाजी बंद होनी चाहिए.”
नवरात्रि गरबा को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि नवरात्रि केवल नाच-गाने का आयोजन नहीं है, बल्कि मां दुर्गा और अंबे की आराधना का पर्व है. उन्होंने कहा, “जो समुदाय मूर्ति पूजा में यकीन नहीं रखता, वह श्रद्धा से ऐसे आयोजनों में नहीं आता. इसलिए जिन्हें आस्था नहीं है, उन्हें धार्मिक आयोजनों में नहीं आना चाहिए. अगर श्रद्धा है तो हाथ में कलावा पहनें और अपने पूजा स्थानों पर नवरात्रि का आयोजन करें. हमारे आयोजन केवल मनोरंजन का स्थल नहीं हैं. जिन्हें आस्था है, वे अपने बहन-बेटियों के साथ आएं.”
वहीं, पश्चिम मेदिनीपुर जिले के डेबरा ब्लॉक के राधामोहनपुर में विश्व हिंदू परिषद का स्थापना दिवस सम्मेलन आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में जिला महासचिव नील कमल पाल ने बताया कि 29 अगस्त 1964 को जन्माष्टमी के दिन विश्व हिंदू परिषद की स्थापना की गई थी. इसका उद्देश्य पारंपरिक रीति-रिवाजों और सिद्धांतों को संरक्षित करना और दुनियाभर के हिंदुओं को एकजुट करना था.
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म को मजबूत और जीवंत बनाए रखने के लिए, इसके सिद्धांतों को जीवित रखने के लिए और जो लोग हिंदू धर्म के बारे में नहीं जानते, उन्हें जागरूक करने के लिए ‘युवा समाज’ और ‘दुर्गा वाहिनी’ का गठन किया गया है.
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एससीएच/
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