
New Delhi, 16 अक्टूबर . Supreme Court ने Friday को तृणमूल कांग्रेस की Lok Sabha सदस्य महुआ मोइत्रा द्वारा दायर एक याचिका का निपटारा कर दिया. अपनी याचिका में उन्होंने पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में कृष्णानगर सर्किट हाउस में ठहरने की व्यवस्था को लेकर शिकायत की थी और साथ ही यह आरोप लगाया था कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) के तहत विकास परियोजनाओं को लागू करने में जिला प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा है.
मोइत्रा ने अगस्त 2026 में कृष्णानगर सर्किट हाउस से देर रात निकाले जाने और उसके बाद 1 सितंबर को नादिया जिला प्रशासन द्वारा जारी एक सर्कुलर के खिलाफ Supreme Court का दरवाजा खटखटाया था. इस सर्कुलर में जिले के सांसदों और विधायकों के लिए सर्किट हाउस में ठहरने के वास्ते तीन से चार दिन पहले सूचना देना अनिवार्य कर दिया गया था.
सुनवाई के दौरान मोइत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने India के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ के सामने कहा कि यह सर्कुलर विशेष रूप से तृणमूल कांग्रेस की सांसद (ममता बनर्जी की पार्टी) को निशाना बनाकर जारी किया गया है. उन्होंने बताया कि अतीत में मोइत्रा बहुत कम समय की सूचना पर भी वहां ठहरती रही हैं.
दूसरी ओर, प्रतिवादी अधिकारियों की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन आरोपों को खारिज किया. उन्होंने कहा कि उस समय सर्किट हाउस में मरम्मत का काम चल रहा था और प्रशासन ने उन्हें ठहरने के लिए कोई दूसरी जगह (वैकल्पिक आवास) देने की पेशकश भी की थी.
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि तीन से चार दिन पहले सूचना देने की शर्त बदले की भावना से लगाई गई लगती है.
अदालत ने आवास को लेकर मोइत्रा की शिकायत पर विचार करते हुए Lok Sabha क्षेत्र की निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में उनकी स्थिति पर भी जोर दिया.
इसके बाद Supreme Court ने 1 सितंबर के सर्कुलर में बदलाव किया और निर्देश दिया कि मोइत्रा अपनी यात्रा से एक दिन पहले जिला प्रशासन को सूचित कर दें, जिसके बाद प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें ठहरने की सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी.
अदालत ने पश्चिम बंगाल Government के इस तर्क को भी मानने से इनकार कर दिया कि आवास केवल उपलब्धता के आधार पर ही दिया जाना चाहिए. Supreme Court ने स्पष्ट किया कि अपने निर्वाचन क्षेत्र की एक निर्वाचित प्रतिनिधि होने के नाते सर्किट हाउस में ठहरने के लिए मोइत्रा का प्राथमिकता वाला अधिकार होगा.
मोइत्रा के वकील ने बताया कि मई 2026 से 18 परियोजनाएं लंबित पड़ी हैं. इस पर Supreme Court ने जिला प्रशासन से कहा कि वे इस शिकायत की जांच करें और उचित कदम उठाएं. साथ ही अदालत ने मोइत्रा को यह छूट भी दी कि यदि वह अभी भी संतुष्ट नहीं होती हैं तो वह संबंधित उच्च न्यायालय में जा सकती हैं.
–
एससीएच/
Skip to content