
New Delhi, 29 सितंबर . उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से साइबर ईस्ट Police ने आरोपी मां-बेटे को गिरफ्तार किया है. इन पर एक फर्जी डिटेक्टिव एजेंसी की वेबसाइट चलाने और एक शिकायतकर्ता से 1.15 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है.
आरोपियों की पहचान गाजियाबाद की रहने वाली 45 वर्षीय पूनम सिंह और उनके 22 वर्षीय बेटे अर्णव सिंह के तौर पर हुई है.
Police ने बताया कि दोनों एक फर्जी वेबसाइट चला रहे थे, जिसे असली डिटेक्टिव एजेंसी की वेबसाइट जैसा दिखने के लिए बनाया गया था.
यह मामला तब सामने आया जब डिटेक्टिव सर्विस की ऑनलाइन तलाश कर रहे भानु प्रताप सिंह ने शिकायत दर्ज कराई. उन्हें यह फर्जी वेबसाइट मिली और उन्होंने मोबाइल नंबर के जरिए संपर्क किया. इसके बाद, डिटेक्टिव और जांच सर्विस देने के बहाने उनसे 1.15 लाख रुपए जमा कराए गए.
Police के मुताबिक, ठगी की रकम पूनम सिंह के नाम पर खुले आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खाते में जमा की गई और बाद में अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई. शिकायत के बाद, साइबर ईस्ट Police स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 318(4), 319(2) और 340 के तहत ई-First Information Report दर्ज की गई.
साइबर ईस्ट Police स्टेशन के एसएचओ इंस्पेक्टर पवन यादव की अगुवाई और ईस्ट जिले की एसीपी (ऑपरेशन्स) अमनदीप कौर की देखरेख में एक खास टीम बनाई गई.
जांच के दौरान, Police ने फर्जी वेबसाइट, उससे जुड़े मोबाइल नंबरों, ईमेल आईडी, बातचीत की जानकारी और पैसों के लेन-देन का तकनीकी विश्लेषण किया. वेबसाइट चलाने वाले लोगों की पहचान करने के लिए डिजिटल और वित्तीय सुरागों को आपस में जोड़ा गया.
तकनीकी निगरानी के आधार पर आरोपियों का पता गाजियाबाद में चला, जहां छापेमारी की गई. अर्णव सिंह के खिलाफ सबूत मिलने के बाद गिरफ्तार कर लिया गया. उसके पास से एक लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त किया गया.
पूनम सिंह का मोबाइल फोन भी जब्त किया गया. Police ने बताया कि उस डिवाइस में कई मोबाइल नंबर थे, जिनमें से एक का इस्तेमाल शिकायतकर्ता से बातचीत के लिए किया गया था. इसके बाद पूनम सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया. दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.
Police ने कहा कि कथित अपराध से जुड़े पूरे डिजिटल और फाइनेंशियल नेटवर्क का पता लगाने के लिए आगे की जांच चल रही है. पूनम सिंह का नाम पहले भी सराय रोहिल्ला Police स्टेशन में आईपीसी की धारा 420 के तहत दर्ज एक मामले में आ चुका है.
साइबर ईस्ट Police ने नागरिकों को सलाह दी है कि वे एडवांस पेमेंट करने से पहले वेबसाइट, सर्विस प्रोवाइडर, कॉन्टैक्ट नंबर और पेमेंट की जानकारी की सच्चाई की जांच कर लें.
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डीकेएम/एबीएम
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