धीरेंद्र शास्त्री पर अखिलेश का हमला, कहा- ‘उप्र-मप्र सीमा पर लगना चाहिए ईशनिंदा करने वालों के प्रवेश वर्जित का बोर्ड’

Lucknow, 4 नवंबर . प्रसिद्ध कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद गहराता जा रहा है. Samajwadi Party के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए धीरेंद्र शास्त्री पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि यदुवंशियों और रघुवंशियों, दोनों की भावनाएं आहत की गई हैं. अब ऐसे लोगों को न ब्रज में प्रवेश मिलेगा और न अवध में. अखिलेश ने यहां तक कहा कि उत्तर प्रदेश और Madhya Pradesh की सीमा पर नाकाबंदी का बोर्ड लगा देना चाहिए, जिस पर लिखा हो कि ‘ईशनिंदा’ करने वालों का उत्तर प्रदेश की धर्मभूमि पर प्रवेश वर्जित है.

सपा मुखिया ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा है, “इन्होंने यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं आहत की हैं. अब इन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा, न अवध में. अब न तो कोई सच्चा रघुवंशी इनका स्वागत करेगा, न सच्चा यदुवंशी. उप्र-मप्र के बार्डर पर इनकी नाकाबंदी का बोर्ड लग जाना चाहिए, जिस पर लिखा हो, ‘ईशनिंदा’ करनेवालों का उप्र की धर्म-भूमि पर प्रवेश वर्जित है.”

अखिलेश यादव ने पोस्ट में लिखा, “जिसने धर्म-मजहब नहीं छोड़ा, वो अगली बार सम्प्रदायों पर छींटाकशी करने से बाज नहीं आएगा. समझाने की जरूरत नहीं, अगला नंबर किस का है. नेपाल बार्डर भी बंद करना पड़ेगा नहीं तो उधर से इधर आना अधिक पास पड़ेगा.”

सपा अध्यक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को Political और धार्मिक टकराव से जोड़ते हुए आगे लिखा, “लगता है उत्तर प्रदेश में किसी बाहरी के इशारे पर किसी की Political-धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का काम हो रहा है. आपस की टकराहट में सियासी लोग भगवान को क्यों ला रहे हैं.”

ज्ञात हो कि Madhya Pradesh के में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना करते हुए टिप्पणी की थी. उन्होंने कहा था कि ‘उनके राम सीधे हैं, जबकि कृष्ण टेढ़े’ हैं. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के नाम, स्वरूप और चाल-ढाल को भी इसी संदर्भ में टेढ़ा बताते हुए भगवान राम को हर लिहाज से सीधा बताया था.

धीरेंद्र शास्त्री के इस कथन के सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया और धार्मिक व Political हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं. विवाद बढ़ने के बाद बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने अपने बयान पर खेद जताते हुए हाथ जोड़कर माफी मांगी. उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान राम और श्रीकृष्ण एक ही हैं तथा दोनों के बीच किसी तरह का अंतर नहीं है. उनकी टिप्पणी का उद्देश्य दोनों आराध्यों के बीच भेद पैदा करना या किसी तरह का विभाजन करना नहीं था.

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विकेटी/डीसीएच