
देहरादून, 10 अक्टूबर . देहरादून में एनसीबी की उत्तराखंड के लिए त्रैमासिक राज्य स्तरीय संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की बैठक में Saturday को मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय को और मजबूत करने की रणनीतियों पर चर्चा की गई. एक अधिकारी ने यह जानकारी दी.
अधिकारी ने एक बयान में बताया कि एनसीबी (उत्तरी क्षेत्र) के उप महानिदेशक की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एनआईए, डीआरआई, ईडी, आयकर विभाग, एसएसबी, आईबी, उत्तराखंड एएनटीएफ और एफडीए के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
बयान में बताया गया कि चर्चा मादक पदार्थों की तस्करी के प्रमुख क्षेत्रों, नेपाल से जुड़े तस्करी मार्गों, सीमा पर रोक, उभरते तौर-तरीकों और औषधि एवं अग्रदूतों के दुरुपयोग पर केंद्रित थी.
एनसीबी ने बताया कि प्रतिभागियों ने गुप्त प्रयोगशालाओं, वित्तीय जांच, पीआईटी-एनडीपीएस और मादक पदार्थों पर नियंत्रण के विजन डॉक्यूमेंट (2026-29) के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए किए जा रहे प्रयासों पर भी ध्यान केंद्रित किया.
एनसीबी के बयान के मुताबिक, बैठक में एनडीपीएस अदालतों की स्थापना, डार्कनेट और क्रिप्टोकरेंसी जांच में क्षमता निर्माण और एजेंसियों के बीच बेहतर खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र की समीक्षा भी की गई.
बयान में कहा गया है कि उत्तराखंड एएनटीएफ को पिछले पांच वर्षों के उन प्रमुख गांजा मामलों को संकलित करने का आग्रह किया गया है जिनमें Odisha एक स्रोत रहा हो और आपूर्ति नेटवर्क को स्रोत पर ही निशाना बनाने के लिए Odisha अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा गया है.
पिछले महीने एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) के राष्ट्राध्यक्षों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मादक पदार्थों के खिलाफ निर्णायक प्रहार करने की आवश्यकता पर जोर दिया था.
उन्होंने मादक पदार्थों को देश और विश्व के सामने सबसे गंभीर खतरों में से एक बताया और 31 दिसंबर तक India से इसके व्यापार को जड़ से खत्म करने का दृढ़ संकल्प व्यक्त किया.
गृह मंत्री ने कहा कि 2047 तक एक विकसित India के निर्माण, भावी पीढ़ियों की रक्षा और युवाओं को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने के लिए ‘नशा मुक्त भारत’ आवश्यक है.
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) द्वारा ‘एकजुट संकल्प, साझा जिम्मेदारी’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यक्रम में 36 राज्यों और जम्मू-कश्मीर के एएनटीएफ प्रमुखों के साथ-साथ विभिन्न सरकारी विभागों के हितधारक भी शामिल हुए.
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि 2047 तक विकसित India के निर्माण, भावी पीढ़ियों की सुरक्षा और युवाओं को राष्ट्रीय विकास से जोड़ने के लिए ‘नशा मुक्त भारत’ अत्यावश्यक है.
सम्मेलन में विजन डॉक्यूमेंट के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए संस्थागत तंत्र, मांग में कमी, रोकथाम और पुनर्वास तथा मादक पदार्थों की तस्करी के नेटवर्क को नष्ट करने पर तकनीकी सत्र आयोजित किए गए. चर्चाओं में विजन डॉक्यूमेंट के चार रणनीतिक स्तंभों पर प्रकाश डाला गया, जिनमें परिभाषित जिम्मेदारियां, समयसीमा और निगरानी तंत्र शामिल हैं.
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एएसएच/डीकेपी
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