‘देश को सिर्फ आंकड़े नहीं, रोजगार और ज्यादा आय चाहिए’, जीडीपी ग्रोथ पर परमेश्वर ने केंद्र को घेरा

Bengaluru, 4 सितंबर . कर्नाटक के उपChief Minister जी. परमेश्वर ने Friday को India की हाई जीडीपी वृद्धि दर का जश्न मनाने पर केंद्र Government पर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक विकास का असली लाभ आम लोगों तक पहुंचना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश को सिर्फ जीडीपी का बड़ा आंकड़ा नहीं, बल्कि बेहतर रोजगार, अधिक आय और आर्थिक सुरक्षा की जरूरत है.

“हर भारतीय तक पहुंचे विकास, सिर्फ जीडीपी का आंकड़ा नहीं” शीर्षक से जारी बयान में परमेश्वर ने कहा कि हाई जीडीपी दर को समृद्धि का प्रमाणपत्र नहीं माना जा सकता. उन्होंने रोजगार, प्रति व्यक्ति आय, विनिर्माण क्षेत्र और परिवारों की क्रय शक्ति को लेकर केंद्र Government से जवाब मांगा.

परमेश्वर ने 2011-12 से बदलकर 2022-23 किए गए जीडीपी के नए आधार वर्ष, नई कार्यप्रणाली, डेटा स्रोतों और अनुमान लगाने के तरीकों पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि कोविड-19 के बाद आई आर्थिक गिरावट के मुकाबले दिखाई जा रही ऊंची वृद्धि दर की स्वतंत्र समीक्षा और अधिक पारदर्शिता जरूरी है.

उन्होंने कहा, “जीडीपी का आंकड़ा समृद्धि का प्रमाणपत्र नहीं है. दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने के बावजूद India की प्रति व्यक्ति आय अभी भी काफी कम है.”

परमेश्वर ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि 2026 में India की प्रति व्यक्ति जीडीपी करीब 2,813 डॉलर रहने का अनुमान है, जो बांग्लादेश के अनुमानित 2,911 डॉलर से भी कम है.

उन्होंने कहा कि केंद्र Government को यह बताना चाहिए कि 7-8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि का उन युवाओं के लिए क्या मतलब है, जिन्हें अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी नहीं मिल रही, जिन परिवारों की क्रय शक्ति पर दबाव है और जो कम वेतन या अस्थिर रोजगार पर निर्भर हैं.

उपChief Minister ने रोजगार आधारित विकास पर जोर देते हुए कहा कि India को ऐसी मैन्युफैक्चरिंग की जरूरत है, जो लाखों रोजगार पैदा करे, एमएसएमई को मजबूत बनाए, मजदूरी बढ़ाए और शिक्षित युवाओं के लिए अवसर उपलब्ध कराए.

परमेश्वर ने India की बाहरी आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में चालू खाते का घाटा 4.2 अरब डॉलर और व्यापारिक घाटा 86.1 अरब डॉलर रहा. वहीं, 2025-26 में व्यापारिक घाटा बढ़कर 333.19 अरब डॉलर पहुंच गया.

उन्होंने कहा कि तेल की कीमतों, भू-Political तनाव, आयात पर निर्भरता और वैश्विक व्यापार में व्यवधानों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था अब भी संवेदनशील बनी हुई है.

परमेश्वर ने “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आयात पर निर्भरता अभी भी बनी हुई है. उनके मुताबिक आर्थिक विकास ऐसा होना चाहिए, जो India की आर्थिक संप्रभुता को भी मजबूत करे.

उन्होंने कर्नाटक के आर्थिक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य ने तकनीक, नवाचार, मानव संसाधन, उद्यमिता, विनिर्माण और वैश्विक भागीदारी के जरिए टिकाऊ विकास का मॉडल पेश किया है.

परमेश्वर ने कहा, “India को सिर्फ ऊंची जीडीपी नहीं चाहिए. India को ज्यादा आय, बेहतर रोजगार, मजबूत निर्यात, प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और आर्थिक सुरक्षा चाहिए.”

उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति की वास्तविक कसौटी यही है कि विकास समावेशी और टिकाऊ हो और आम भारतीयों के जीवन में वास्तविक सुधार लाए, न कि केवल जीडीपी के आंकड़ों तक सीमित रहे.

डीएससी