
Mumbai , 9 सितंबर . Maharashtra के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता प्रताप सरनाईक ने उत्तर India से Maharashtra की ओर होने वाले पलायन, अमित ठाकरे की धमकी, ‘ऑपरेशन टाइगर’, गरबा में मुस्लिमों की एंट्री और ठाकरे परिवार की Political स्थिति समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी.
उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार में रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं होने को पलायन की एक बड़ी वजह बताया और इसके लिए वहां की पिछली Governmentों और Political नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया.
प्रताप सरनाईक ने समाचार एजेंसी से बातचीत करते हुए कहा कि Mumbai समेत Maharashtra के अलग-अलग शहरों में दूसरे राज्यों से बड़ी संख्या में लोग आकर ऑटो और टैक्सी चलाने समेत विभिन्न काम करते हैं. इनमें बड़ी संख्या उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों की है. उन्होंने सवाल उठाया कि इन राज्यों में सत्ता में रहे नेताओं ने अपने यहां पर्याप्त रोजगार के अवसर क्यों नहीं बनाए. सरनाईक ने आरोप लगाया कि लंबे समय तक कांग्रेस और गांधी परिवार के नेताओं के सत्ता में रहने के बावजूद उत्तर प्रदेश और बिहार में रोजगार की समस्या बनी रही. उन्होंने पूर्व Samajwadi Party और बहुजन समाज पार्टी की Governmentों पर भी पलायन रोकने के लिए पर्याप्त काम नहीं करने का आरोप लगाया.
उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए लोग Mumbai और Maharashtra जैसे शहरों का रुख करते हैं. उन्होंने भाजपा पर नरमी बरतते हुए कहा कि पिछले 15-20 वर्षों में उत्तर India के राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की Governmentें आने के बाद Mumbai की ओर पलायन में कमी आई है, लेकिन यह पूरी तरह रुका नहीं है. भाजपा और सहयोगी दलों के काम की सराहना करते हुए उन्होंने पहले की कांग्रेस, सपा और बसपा Governmentों को पलायन के लिए जिम्मेदार ठहराया.
अमित ठाकरे की ओर से धमकी दिए जाने पर सरनाईक ने कहा कि वह इस तरह की धमकी का समर्थन नहीं करते. Political मतभेद अपनी जगह है, लेकिन किसी को मारने-पीटने की बात करना गलत है और ऐसे बयान नहीं दिए जाने चाहिए. जिन मुद्दों को बातचीत और सामाजिक तरीके से सुलझाया जा सकता है, उनके लिए विवाद या आक्रामक बयानबाजी की जरूरत नहीं है.
शिवसेना (यूबीटी) के नेताओं के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में आने की चर्चाओं के बीच सरनाईक ने दावा किया कि उद्धव ठाकरे गुट के कुछ विधायक उनके संपर्क में हैं. उन्होंने कहा कि चुनाव जीतकर आए कुछ सांसदों और विधायकों को अब अपनी Political गलती का अहसास हो रहा है और वे शिंदे के साथ आ रहे हैं. ‘ऑपरेशन टाइगर’ को किसी तय संख्या या औपचारिक अभियान के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. बालासाहेब ठाकरे ने शिवसेना की स्थापना जिन विचारों के आधार पर की थी, उनमें हिंदुत्व भी महत्वपूर्ण था, जिससे 2019 में कांग्रेस के साथ जाने के बाद उद्धव ठाकरे ने उस विचारधारा से दूरी बना ली.
सरनाईक ने कहा कि कितने विधायक संपर्क में हैं और वे कब शिवसेना में आएंगे, इसकी संख्या या समय बताना अभी उचित नहीं होगा, लेकिन संपर्क में होने की बात उन्होंने सच बताई.
उन्होंने ठाकरे परिवार के Political भविष्य पर कहा कि किसी पार्टी या नेता की राजनीति अचानक खत्म नहीं होती. Political जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे की राजनीति पूरी तरह समाप्त हो जाएगी, ऐसा कहना सही नहीं होगा. हालांकि, उन्होंने दावा किया कि उद्धव ठाकरे के 2019 के Political फैसलों के बाद उनकी राजनीति का दायरा सीमित हुआ है.
गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिमों के प्रवेश और बुर्के पर प्रतिबंध को लेकर दिए गए बयानों पर सरनाईक ने मंत्री नितेश राणे से असहमति जताई. उन्होंने कहा कि ऐसे बयान कई बार प्रचार पाने के लिए दिए जाते हैं. वह बड़े स्तर पर दही हांडी और गणपति उत्सव आयोजित करते हैं, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल होते हैं और उन्हें इसमें कोई परेशानी नहीं होती. त्योहारों में लोगों की भागीदारी को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के उस कथन का भी समर्थन किया, जिसमें मुस्लिमों के प्रति प्रेम और सद्भाव को हिंदू मूल्यों से जोड़ा गया था.
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/डीकेपी
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