
New Delhi, 16 अक्टूबर . केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ‘रिजीम चेंज’ की वकालत करने वालों पर निशाना साधा है. उन्होंने India के लोगों से अपील की है कि वे गद्दारों को कभी माफ न करें. यह बयान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के Government बदलने वाले बयान पर छिड़े सियासी विवाद के बीच आया है.
किरेन रिजिजू ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “प्यारे देशभक्त भारतीयों, याद रखें, ‘अपने दुश्मनों को एक बार माफ करो, दोस्तों को दो बार, लेकिन गद्दारों को कभी नहीं’.”
Union Minister का यह बयान तब आया, जब उन्होंने प्रशांत भूषण की प्रेस कॉन्फ्रेंस का एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वरिष्ठ वकील ने खुलेआम ‘रिजीम चेंज’ की मांग को स्वीकार किया था. प्रेस कॉन्फ्रेंस में भूषण ने कहा था, “हां, हम रिजीम चेंज चाहते हैं.”
इससे पहले रिजिजू ने भूषण के 2011 के कश्मीर वाले बयान का वीडियो भी शेयर किया था, जिसमें उन्हें यह कहते हुए सुना गया था, “अगर कश्मीरी लोग अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें अलग होने दें.”
एक अन्य पोस्ट में रिजिजू ने इस सियासी लड़ाई को तीखे शब्दों में बताया और संविधान का समर्थन करने वालों और अराजकता फैलाने वालों के बीच फर्क बताया.
रिजिजू ने एक्स पोस्ट में लिखा था, “लड़ाई की रेखा खिंच गई है. यह दिमागी नक्सल बनाम देशभक्त भारतीय है.”
इस पूरे मामले ने ‘रिजीम चेंज’ की मांग के अर्थ और असर को लेकर सियासी बहस छेड़ दी है. सत्ताधारी पार्टी के नेताओं ने विपक्ष और प्रदर्शन के आयोजकों पर Government को अस्थिर करने की कोशिश का आरोप लगाया है.
इससे पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष को घेरा. Lucknow में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने आरोप लगाया कि ‘रिजीम चेंज’ शब्द का इस्तेमाल दिखाता है कि प्रदर्शनकारियों का मकसद अराजकता फैलाकर सत्ता पर कब्जा करना है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई न तो चुनाव आयोग के लिए है और न ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के लिए, बल्कि उसका एकमात्र मकसद अव्यवस्था पैदा करके सत्ता हासिल करना है. बांग्लादेश का जिक्र करते हुए उन्होंने रिजीम चेंज की वकालत करने वालों पर Government को गिराने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया.
उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र का इस्तेमाल अराजकता पैदा करने के लाइसेंस के तौर पर नहीं किया जा सकता और Political नेताओं को जनता के जनादेश और देश की संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए.
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एबीएम
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