दीपावली पर हवाई किराये में 700 प्रतिशत बढ़ोतरी की याचिका पर सुनवाई से Supreme Court का इनकार, कहा-‘हवाई यात्रा न करें’

New Delhi, 3 नवंबर . Supreme Court ने दीपावली 2026 के दौरान घरेलू हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी को लेकर दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है. जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर टिकट की कीमतें बहुत ज्यादा हैं तो यात्री हवाई यात्रा न करें.

यह आवेदन जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और अपारेश कुमार सिंह की बेंच के सामने मेंशन किया गया था, जहां आवेदक के वकील ने कहा कि त्योहारी सीजन के दौरान हवाई किराये में 700 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है.

वकील ने दलील दी कि हवाई यात्रा एक आवश्यक सेवा बन गई है और इस तरह की भारी बढ़ोतरी संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है, इसलिए Supreme Court को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए. हालांकि, जस्टिस नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने तत्काल लिस्टिंग की मांग को ठुकरा दिया और कहा, “हवाई यात्रा न करें. अगला मामला.”

यह अंतरिम आवेदन एक लंबित जनहित याचिका (पीआईएल) में दायर किया गया है, जिसमें नागरिक उड्डयन क्षेत्र में कथित अपारदर्शी, शोषणकारी और एल्गोरिदम-आधारित मूल्य निर्धारण प्रथाओं को चुनौती दी गई है, जिसमें अप्रत्याशित किराया उतार-चढ़ाव, अंतिम समय में भारी बढ़ोतरी और एयरलाइंस द्वारा लगाए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क शामिल हैं.

यह घटनाक्रम Supreme Court द्वारा हवाई किराए में अस्थिरता और एयरलाइन मूल्य निर्धारण को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे की लगातार जांच की पृष्ठभूमि में आया है. इससे पहले की सुनवाई में Supreme Court ने कहा था कि प्राइवेट एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले हवाई किराए के युक्तिकरण की जरूरत है और एक ही दिन एक ही गंतव्य के लिए अलग-अलग एयरलाइंस द्वारा लिए जाने वाले टिकट की कीमतों में भारी अंतर पर प्रकाश डाला था.

जस्टिस नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा था, “लोगों को कुछ राहत देने की कोशिश करो. एक ही दिन, एक ही गंतव्य के लिए जाने वाली उड़ानों में एक एयरलाइन इकोनॉमी क्लास में 8,000 रुपए लेती है जबकि दूसरी 18,000 रुपए लेती है. कुछ युक्तिकरण तो होना ही चाहिए.”

इस कार्यवाही के बाद केंद्र ने Supreme Court को बताया था कि हवाई किराए की संरचना और अतिरिक्त शुल्कों से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए भारतीय वायुयान अधिनियम, 2024 के तहत नियम बनाए जा रहे हैं.

16 अक्टूबर को केंद्र ने Supreme Court को बताया कि एयरलाइंस द्वारा लगाए जाने वाले हवाई किराए और अतिरिक्त शुल्कों को विनियमित करने के नियमों को अंतिम रूप दे दिया गया है और प्रशासनिक मंजूरी दे दी गई है.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस नाथ की अगुवाई वाली बेंच को आश्वासन दिया था कि नियम दो सप्ताह के भीतर प्रकाशित किए जाएंगे. इस दलील पर ध्यान देते हुए Supreme Court ने केंद्र को अगली सुनवाई की तारीख पर प्रकाशित नियमों को उसके सामने रखने का निर्देश दिया और मामले को 16 नवंबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया.

Supreme Court के हस्तक्षेप के बाद केंद्र ने भारतीय वायुयान नियम, 2026 को अधिसूचित किया है, जो लगभग नौ दशकों से नागरिक उड्डयन क्षेत्र को नियंत्रित करने वाले विमान नियम, 1937 की जगह लेगा.

नया नियामक ढांचा 1 जनवरी, 2027 से लागू होगा. अन्य प्रावधानों के अलावा, नियम किराया पारदर्शिता आवश्यकताओं को पेश करते हैं, जो एयरलाइंस को यात्रियों द्वारा देय कुल टिकट मूल्य के साथ-साथ बेस किराया, कर, शुल्क, रद्दीकरण शुल्क और रिफंड नीतियों का ब्योरा देने के लिए अनिवार्य बनाते हैं. एयरलाइन टैरिफ नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) की निगरानी के अधीन रहेगा.

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पीएम