दिशा सालियान केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुलिस की जांच पर उठाए सवाल, पिता को न्याय की उम्मीद

Mumbai , 27 अगस्त . दिशा सालियान की मौत मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के बाद मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है. सुनवाई के दौरान अदालत ने Mumbai Police की ओर से की गई जांच और सीआरपीसी की धारा 174 के तहत की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए. अदालत में यह सवाल भी सामने आया कि जब गंभीर अपराध की शिकायत का दावा किया जा रहा है, तो First Information Report दर्ज क्यों नहीं की गई. कोर्ट की ओर से यह भी कहा गया कि अभी भी First Information Report दर्ज की जा सकती है.

सुनवाई के बाद दिशा सालियान के पिता ने अदालत से इंसाफ की उम्मीद जताते हुए कहा कि उन्हें कोर्ट पर भरोसा है. छह साल बाद उन्हें महसूस हो रहा है कि अब उन्हें, उनकी बेटी और उनकी पत्नी को न्याय मिलेगा. Police की ओर से दाखिल की गई क्लोजर रिपोर्ट पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि Police ने जो क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, वह पूरी तरह फर्जी थी और उसमें सही तथ्यों को सामने नहीं रखा गया. यह रिपोर्ट आरोपियों को बचाने के उद्देश्य से तैयार की गई थी.

उन्होंने कहा कि दिशा की मौत के दिन वह अस्पताल पहुंचे थे. उसी दिन Police ने उनका बयान लिया और उनसे पूछा कि क्या उन्हें किसी पर शक है. उन्होंने उस समय कहा था कि अभी उन्हें किसी पर शक नहीं है और बाद में इस बारे में देखा जाएगा. इसके दो-तीन दिन बाद उन्हें मालवणी Police स्टेशन बुलाया गया. वहां Police ने दिशा की पढ़ाई, उसके स्कूल-कॉलेज, नौकरी और उसके साथ काम करने वाले लोगों के बारे में सवाल किए.

दिशा के पिता ने कहा कि उनकी बेटी की मौत के बाद मीडिया में लगातार रेप और मर्डर जैसी बातें सामने आ रही थीं. इन खबरों को सुनकर वह बेहद परेशान हो गए थे और उस समय उन्हें केवल राहत चाहिए थी. इसी परिस्थिति में उन्होंने कहा था कि उनकी बेटी की मौत का फायदा न उठाया जाए और जो सही है, वही बताया जाए.

दिशा के पिता ने बताया कि वह कुछ लोगों के खिलाफ First Information Report दर्ज करने की मांग कर चुके हैं. उन्होंने आदित्य ठाकरे, रोहन राय, सूरज पंचोली और डिनो मोरिया समेत दो-तीन अन्य लोगों के नाम लिए. उन्होंने कहा कि मामला दर्ज होने के बाद जांच होनी चाहिए और जिसकी भी गलती सामने आए, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए. दोष सामने आने पर गिरफ्तारी होनी चाहिए.

दिशा सालियान के पिता के वकील नीलेश ओझा ने सुनवाई को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि कोर्ट ने सरकारी वकील और Police से स्पष्ट सवाल किया कि धारा 174 के तहत की गई जांच की कानूनी स्थिति क्या है. Police ने अदालत में कहा कि उसने धारा 174 के तहत जांच की है और गवाहों के बयान दर्ज किए हैं. इस पर अदालत ने सवाल किया कि यदि शिकायत में गैंगरेप और हत्या जैसे संज्ञेय अपराध के आरोप हैं, तो केवल धारा 174 के तहत जांच कैसे की जा सकती है.

ओझा ने कहा कि Supreme Court के केस लॉ के आधार पर ऐसी जांच का कानूनी आधार नहीं है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एक पिता को अपनी बेटी की मौत की सच्चाई जानने का अधिकार है और इसके लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच होना जरूरी है. सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकारी वकील से कहा कि यदि इस संबंध में Supreme Court के फैसले का कोई काउंटर या अलग कानूनी आधार है, तो उसे अगली सुनवाई में अदालत के सामने रखा जाए.

सुनवाई के दौरान सीबीआई जांच को लेकर भी चर्चा हुई. नीलेश ओझा ने दावा किया कि आदित्य ठाकरे की ओर से दाखिल एक इंटरवेंशन एप्लीकेशन में हलफनामे के जरिए यह कहा गया था कि मामले की सीबीआई जांच हो चुकी है और उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है. उन्होंने अदालत के सामने इस दावे को गलत बताया. इसके बाद अदालत ने सीबीआई के वकील से इस बारे में जानकारी मांगी. ओझा का दावा है कि सीबीआई के वकील ने अपने कार्यालय से पुष्टि करने के बाद अदालत को बताया कि सीबीआई ने दिशा सालियान मामले की कोई जांच नहीं की और न ही कोई क्लीन चिट दी.

ओझा ने अदालत से कथित तौर पर गलत हलफनामा दाखिल करने के आधार पर आदित्य ठाकरे की याचिका खारिज करने, भारी जुर्माना लगाने और गिरफ्तारी वारंट जारी करने की मांग किए जाने की बात कही. वकील नीलेश ओझा ने सुनवाई के दौरान पूर्व Police अधिकारी सचिन वाजे का भी उल्लेख किया. उन्होंने अदालत के सामने आरोप लगाया कि घटना के बाद मामले को दबाने के लिए सचिन वाजे को इस्तेमाल किया गया और वह कथित कवर-अप के मास्टरमाइंड थे.

ओझा ने कथित तौर पर फर्जी cctv फुटेज और फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार किए जाने का भी आरोप लगाया. उन्होंने पंचनामे में तारीखों का जिक्र करते हुए कहा कि एक जगह 8 जून और दूसरी जगह 9 जून की तारीख दर्ज होने की बात सामने आती है. उन्होंने यह भी दावा किया कि रोहन राय और उनके दोस्तों द्वारा कमरे का दरवाजा तोड़े जाने की बात कही गई थी, लेकिन Police के पास इसका कोई पंचनामा या अन्य सबूत नहीं था. सुनवाई के बाद नीलेश ओझा ने कहा कि अदालत में हुई कानूनी बहस के आधार पर उन्हें 100 प्रतिशत उम्मीद है कि इस पूरे मामले में First Information Report दर्ज करने के आदेश दिए जाएंगे.