दिवाली से पहले बाजार में लौटी रौनक; अगले हफ्ते वैश्विक तनाव, कच्चे तेल और कॉर्पोरेट नतीजों पर रहेगी निवेशकों की नजर

Mumbai , 1 नवंबर . लगातार दबाव में रहने के बाद भारतीय शेयर बाजार ने दिवाली से पहले मजबूत वापसी दर्ज की है. इस सप्ताह (26-30 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में) सेंसेक्स 1,335.70 अंक या 1.83 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,459.53 पर बंद हुआ, तो वहीं निफ्टी 50 453.10 अंक या 2.00 प्रतिशत की तेजी के साथ 23,053.10 पर बंद हुआ. इस दौरान फार्मा, आईटी और चुनिंदा सेक्टरों में खरीदारी लौटने से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ और बाजार सकारात्मक रुख के साथ सप्ताह का समापन करने में सफल रहा.

वहीं अब बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर के पहले कारोबारी सप्ताह में बाजार की दिशा कई वैश्विक और घरेलू कारकों से तय होगी. अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कॉर्पोरेट नतीजे निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं. इसी वजह से बाजार में तेजी का माहौल तो है, लेकिन उतार-चढ़ाव भी बना रह सकता है.

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, निफ्टी ने सप्ताह की शुरुआत कमजोर रुख के साथ की थी और पहले कारोबारी दिन 22,387.35 के साप्ताहिक निचले स्तर तक फिसल गया था. हालांकि इस स्तर पर मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसके बाद बाजार ने वापसी की और अंत में निफ्टी 23,053.10 पर बंद हुआ. पूरे सप्ताह में सूचकांक करीब 453 अंकों (2 प्रतिशत) की बढ़त दर्ज करने में सफल रहा.

तकनीकी रूप से निफ्टी ने 200-वीक एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) और दीर्घकालिक अपट्रेंड लाइन के पास मजबूत समर्थन लिया है. इससे बाजार की निकट अवधि की तस्वीर पहले की तुलना में बेहतर हुई है.

सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी फार्मा सबसे बड़ा विजेता रहा और लगभग 7.09 प्रतिशत चढ़ा. इसके बाद मीडिया इंडेक्स में 4.34 प्रतिशत और रियल्टी इंडेक्स में 3.77 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई.

इसके अलावा मेटल, ऑटो, एफएमसीजी और पीएसयू बैंक शेयरों में भी 2 से 3 प्रतिशत के बीच बढ़त देखी गई. हालांकि बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र की बढ़त अपेक्षाकृत सीमित रही.

विश्लेषकों का कहना है कि दूसरी तिमाही के नतीजों ने कई सेक्टरों में स्टॉक आधारित खरीदारी को समर्थन दिया है.

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निकट अवधि में 23,200 का स्तर निफ्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) बना हुआ है. यदि सूचकांक इस स्तर को निर्णायक रूप से पार कर लेता है तो अगला लक्ष्य 23,700 से 24,000 के बीच हो सकता है.

वहीं नीचे की ओर 22,850 पहला प्रमुख सपोर्ट है. इसके बाद 22,600 से 22,400 का क्षेत्र बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह वही क्षेत्र है जहां 200-वीक ईएमए और दीर्घकालिक ट्रेंडलाइन मौजूद हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है. ब्रेंट क्रूड हाल ही में 117 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया था. यदि तेल कीमतें ऊंची बनी रहती हैं तो महंगाई और विदेशी निवेश प्रवाह पर दबाव बढ़ सकता है.

इसके अलावा, अमेरिका-ईरान तनाव और अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव भी वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे.

विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की तकनीकी स्थिति में सुधार जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी निफ्टी को 23,200 के ऊपर टिककर मजबूती दिखानी होगी. तब ही बड़ी तेजी की संभावना बनेगी. फिलहाल रणनीति “बाय ऑन डिप्स” यानी गिरावट पर चुनिंदा खरीदारी की रखी जा सकती है.

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डीबीपी