
New Delhi, 7 नवंबर . दिवाली पर कश्मीरी केसर, अनोखी गोल्ड-फिल्ट्रेशन प्रक्रिया और India की समृद्ध वनस्पति विरासत का उत्सव मनाने वाली प्रीमियम जिन जैसलमेर गोल्ड अपनी विशिष्ट पहचान के कारण चर्चा में है. कश्मीरी केसर इसकी कहानी की शुरुआत भर है. जैसलमेर गोल्ड का नाम उस विशेष फिल्ट्रेशन प्रक्रिया से भी जुड़ा है, जिसमें जिन को सुनहरे रेशमी तंतुओं से बने आपस में गुंथे फिल्टर से गुजारा जाता है. ब्रांड का दावा है कि यह प्रक्रिया पेय को स्वर्ण आयनों से समृद्ध बनाती है. इसमें 18 बॉटैनिकल्स का उपयोग किया गया है, जिनमें 14 India से प्राप्त किए गए हैं. यही संयोजन इसे दुर्लभ सामग्री, शिल्प कौशल और अनूठी निर्माण प्रक्रिया वाला उत्पाद बनाता है.
जब ‘गोल्ड’ केवल नाम नहीं होता
दिवाली और सोने का रिश्ता सदियों पुराना है. यह हमारे दीपों, उपहारों और उत्सवों की चमक में दिखाई देता है. सोना दुर्लभता, मूल्य और उत्कृष्ट शिल्प का प्रतीक भी माना जाता है. लेकिन जैसलमेर गोल्ड के लिए यह केवल प्रतीकात्मक संबंध नहीं है, बल्कि इसकी निर्माण प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है.
इस नाम के पीछे दो प्रमुख तत्व हैं. पहला, कश्मीरी केसर, जिसे दुनिया के सबसे मूल्यवान मसालों में गिना जाता है और जिसे अक्सर “मसालों का सोना” कहा जाता है. दूसरा, विशेष गोल्ड-फिल्ट्रेशन प्रक्रिया, जिसके बारे में दावा किया जाता है कि यह जिन को स्वर्ण आयनों से समृद्ध बनाती है. यही वजह है कि ‘गोल्ड’ शब्द केवल लेबल की सजावट नहीं बल्कि उत्पाद की वास्तविक पहचान का हिस्सा है.
आज के समय में उपभोक्ता किसी पेय के स्रोत, निर्माण प्रक्रिया और उसकी मौलिकता में अधिक रुचि रखते हैं. ऐसे में जैसलमेर गोल्ड एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करती है जो केवल बॉटैनिकल्स तक सीमित नहीं है, बल्कि दुर्लभ भारतीय सामग्री, विशेष फिल्ट्रेशन तकनीक और पूरे देश से चुने गए स्वादों को एक साथ जोड़ती है.
केसर का संबंध: सोने जैसा मूल्यवान मसाला
दुनिया के सबसे मूल्यवान मसालों में से एक, केसर अपने रंग, सुगंध और इसे प्राप्त करने में लगने वाली मेहनत के लिए प्रसिद्ध है. नाजुक लाल धागों की क्रोकस फूल से निकाले जाने वाले बारीक लाल रेशों को हाथों से चुना जाता है, जो बेहद श्रमसाध्य प्रक्रिया है. आमतौर पर माना जाता है कि एक किलोग्राम केसर प्राप्त करने के लिए लगभग 1.5 लाख से 2.5 लाख फूलों की आवश्यकता पड़ सकती है.
केसर की यही दुर्लभता उसे सोने जैसे कीमती धातुओं के बराबर प्रतिष्ठा दिलाती है. जैसलमेर गोल्ड में कश्मीरी केसर केवल एक प्रीमियम सामग्री नहीं है, बल्कि India की विशिष्ट कृषि और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतिनिधित्व भी करता है. कश्मीर के केसर खेतों का लंबा इतिहास है और हर रेशा धैर्य, कौशल और पीढ़ियों से चली आ रही विशेषज्ञता की कहानी कहता है.
गोल्ड में छिपा ‘गोल्ड’ की असली कहानी
जिन के आसवन के बाद उसकी सबसे विशिष्ट प्रक्रिया शुरू होती है. जैसलमेर गोल्ड को एक विशेष फिल्टर से गुजारा जाता है, जो सुनहरे रेशमी तंतुओं से बना होता है. ब्रांड के अनुसार यह गोल्ड फिल्ट्रेशन प्रक्रिया जिन को स्वर्ण आयनों से समृद्ध बनाती है और इसके स्वाद को अधिक संतुलित और मुलायम बनाती है.
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह प्रक्रिया तैयार जिन में सोने की पत्ती या सोने के कण मिलाने जैसी नहीं है. इसे एक विशिष्ट उत्पादन तकनीक के रूप में समझा जाना चाहिए, न कि सजावटी तत्व के रूप में.
जिन की दुनिया में जहां डिस्टिलेशन, बॉटैनिकल चयन और फिल्ट्रेशन अंतिम स्वाद को प्रभावित करते हैं, वहीं यह विशेष प्रक्रिया जैसलमेर गोल्ड को अलग पहचान देती है. यही कारण है कि इसके नाम में “गोल्ड” शब्द का वास्तविक महत्व है.
18 बॉटैनिकल्स, 14 भारतीय कहानियां
जैसलमेर गोल्ड की विशेषता इसके विस्तृत बॉटैनिकल मिश्रण में भी छिपी है, जिसमें कुल 18 बॉटैनिकल्स का उपयोग किया गया है, जिनमें 14 India के अलग-अलग क्षेत्रों से लाए गए हैं.
भारतीय बॉटैनिकल्स में कश्मीर का केसर, रामपुर डिस्टिलरी गार्डन की गुलाब की पंखुड़ियां और तेजपत्ता, दार्जिलिंग की ग्रीन टी, पूर्णिया का गंधराज नींबू छिलका, जैसलमेर का धनिया, नागपुर के संतरे का छिलका, कर्नाटक की काली मिर्च, दालचीनी, गुलाबी मिर्च, जायफल, मुलेठी, खस और लेमनग्रास शामिल हैं. इसके अलावा जुनिपर बेरी, एंजेलिका रूट, कैरावे बीज और क्यूबेब मिर्च का भी उपयोग किया गया है.
ये सभी सामग्री मिलकर India के विविध स्वादों और जलवायु क्षेत्रों का एक विस्तृत मानचित्र तैयार करती हैं. गुलाब की खुशबू, नींबू और संतरे की ताजगी, मसालों की गर्माहट तथा केसर और चाय की विशिष्टता इसे एक अनूठा भारतीय स्वाद प्रदान करती है, जबकि जुनिपर इसका पारंपरिक जिन स्वरूप बनाए रखता है.
शिल्प से तैयार एक विशेष जिन
किसी जिन का निर्माण कई चरणों का परिणाम होता है, जिसमें स्पिरिट बेस का चयन, बॉटैनिकल्स का संतुलन, डिस्टिलेशन की तकनीक और बोतलबंदी से पहले की जाने वाली प्रक्रियाएं शामिल होती हैं. जैसलमेर गोल्ड की पहचान इसकी 18-बॉटैनिकल रेसिपी और विशेष गोल्ड-फिल्ट्रेशन प्रक्रिया से बनती है.
ब्रांड के अनुसार गोल्ड एडिशन को डबल-डिस्टिल किया जाता है और फिर विशेष गोल्ड फिल्ट्रेशन प्रक्रिया से गुजारा जाता है. जहां बॉटैनिकल्स इसके स्वाद की बुनियाद तैयार करते हैं, वहीं फिल्ट्रेशन इसकी पहचान को अंतिम रूप देता है.
भारतीय उत्सवों के लिए एक खास विकल्प
दिवाली पर उपहार चुनते समय लोग ऐसी चीजों की तलाश करते हैं जिनमें एक कहानी हो और जो अलग पहचान रखती हो. जैसलमेर गोल्ड कश्मीरी केसर की दुर्लभता, 18 बॉटैनिकल्स की विविधता, 14 भारतीय सामग्री और खास गोल्ड-फिल्ट्रेशन प्रक्रिया को एक साथ जोड़ती है.
यह भारतीय प्रीमियम स्पिरिट्स उद्योग के बढ़ते आत्मविश्वास की भी कहानी है. India की क्षेत्रीय परंपराएं और प्राकृतिक सामग्री आधुनिक डिस्टिलरी उद्योग को एक समृद्ध आधार प्रदान करती हैं और जैसलमेर गोल्ड उसी विविधता को एक विशिष्ट भारतीय दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करती है.
इस दिवाली, सोने का अर्थ केवल धातु या रंग नहीं रह जाता. जैसलमेर गोल्ड के लिए यह केसर, निर्माण प्रक्रिया, गोल्ड फिल्ट्रेशन और भारतीय शिल्प कौशल से जुड़ी एक पूरी कहानी है, जो इसके नाम को वास्तविक अर्थ प्रदान करती है.
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डीबीपी
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