
नई दिल्ली, 25 सितंबर . दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने की घटना के बाद हाई कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. एमसीडी ने Friday को सुनवाई के दौरान अवैध निर्माण के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी दी है.
एमसीडी ने अपने हलफनामे में बताया कि अब तक 543 प्रॉपर्टी को ध्वस्त किया गया है, 178 प्रॉपर्टी सील की गई हैं और 354 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं.
एमसीडी ने कोर्ट को यह भी बताया कि कार्रवाई केवल प्रॉपर्टी मालिकों तक सीमित नहीं रही है, बल्कि जिम्मेदारी तय करते हुए पांच अधिकारियों को सस्पेंड किया गया है. इनमें संबंधित जोन के डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं.
एमसीडी के मुताबिक, दिल्ली में फिलहाल 2,453 पीजी संचालित हो रहे हैं, जिनमें कुल 32,247 कमरे हैं और करीब 50,529 लोग रह रहे हैं. इनमें से केवल 512 पीजी ही मास्टर प्लान के प्रावधानों के मुताबिक चल रहे हैं.
मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने पीजी की वैधता और उनकी निगरानी की व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए.
कोर्ट ने पूछा कि अगर पीजी मास्टर प्लान के मुताबिक संचालित नहीं हो रहे हैं तो उनकी कानूनी स्थिति क्या है. अदालत ने नरेला जोन का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 82 पीजी हैं, लेकिन उनमें से एक भी मास्टर प्लान के मुताबिक नहीं है.
वहीं, दिल्ली यूनिवर्सिटी ने कोर्ट को बताया कि उसके पास करीब 5,600 छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध है, जबकि याचिकाकर्ता के मुताबिक विश्वविद्यालय में करीब 1.3 लाख छात्र पढ़ते हैं. हाई कोर्ट ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के जवाब को अस्पष्ट बताते हुए उसे नया जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया.
दरअसल, दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को एक पांच मंजिला पीजी इमारत (‘हॉस्टल डेज’) ढहने से कई लोगों की मौत हो गई थी.
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एएसएच/डीकेपी
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