
New Delhi, 28 अगस्त . बुढ़ापे में भी अगर दिमाग को चुस्त-दुरुस्त रखना है, तो उसे खाली मत छोड़िए. उसे काम में लगाए रखिए. ऐसा हमारा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, India Government का कहना है.
मंत्रालय ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि अपने मस्तिष्क को व्यस्त रखना बहुत जरूरी है. मंत्रालय ने लिखा, “अपने मस्तिष्क को व्यस्त रखें. मानसिक प्रेरणा (उद्दीपन) से स्मृति और संज्ञानात्मक स्वास्थ्य बेहतर होता है. पहेलियां हल करें, दिमागी खेल खेलें और जिज्ञासु बने रहें.”
मंत्रालय का कहना है कि जैसे शरीर को फिट रखने के लिए कसरत जरूरी है, वैसे ही दिमाग को फिट रखने के लिए उसकी भी कसरत जरूरी है. दिमाग की कसरत का सबसे आसान तरीका पहेलियां, दिमागी खेल और नई-नई चीजों के बारे में जानने की इच्छा है.
अक्सर देखा जाता है कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ लोग चीजें भूलने लगते हैं. रखा हुआ सामान याद नहीं रहता, किसी का नाम याद करने में वक्त लगता है. ये सब संज्ञानात्मक स्वास्थ्य कमजोर होने की निशानी है. अगर आप पहले से ही अपने दिमाग को एक्टिव रखेंगे, तो इस परेशानी से काफी हद तक बचा जा सकता है.
सुबह अखबार में जो सुडोकू या क्रॉसवर्ड आता है, वो सिर्फ टाइमपास नहीं है. वो आपके दिमाग के लिए जिम जैसा है. जब आप कोई पहेली हल करते हैं, तो आपके दिमाग की नसें ज्यादा तेजी से काम करती हैं. इससे आपकी याददाश्त तेज होती है और सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है.
इसी तरह शतरंज, कैरम, लूडो जैसे दिमागी खेल भी बहुत फायदेमंद हैं. ये खेल आपको रणनीति बनाना सिखाते हैं और आपके फोकस को बढ़ाते हैं. घर में दादा-दादी, नाना-नानी के साथ बच्चे अगर ये खेल खेलें, तो दोनों को फायदा होगा.
इसके साथ ही जिज्ञासु बने रहना भी बहुत जरूरी है. सीखना कभी बंद नहीं करना चाहिए. नई किताबें पढ़िए, नई जगहों के बारे में जानिए, लोगों से बातचीत कीजिए, कुछ नया करने की कोशिश कीजिए. जब आप जिज्ञासु रहते हैं, तो आपका दिमाग नई चीजों को सीखने के लिए हमेशा तैयार रहता है. इससे बुढ़ापे में भी आपका दिमाग जवान बना रहता है.
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पीआईएम/एबीएम
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