
Bhopal , 7 अक्टूबर . कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और Madhya Pradesh के पूर्व Chief Minister दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक लगभग 930 किलोमीटर लंबी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ निकालेंगे. यह यात्रा तिरंगा और पांच रंगों वाले धर्मध्वज के साथ ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ (जहां धर्म है, वहीं विजय है) के संदेश के साथ निकाली जाएगी.
दिग्विजय सिंह ने Wednesday को Bhopal में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यात्रा की रूपरेखा और उद्देश्यों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह यात्रा 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होगी और अयोध्या के श्रीराम मंदिर में समाप्त होगी.
यात्रा उज्जैन से शुरू होकर शाजापुर, सारंगपुर, राजगढ़, चाचौड़ा, आरोन, अशोकनगर, चंदेरी और ओरछा से होकर गुजरेगी. इसके बाद यह उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर उरई, कालपी, Kanpur देहात, Lucknow देहात और बाराबंकी होते हुए अयोध्या पहुंचेगी.
यह यात्रा उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर, ओरछा के रामराजा Government मंदिर और अयोध्या के श्रीराम मंदिर को जोड़ने का काम करेगी.
यात्रा के महत्व को समझाते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि धर्म ध्वज उन मूल्यों का प्रतीक होगा जिन्हें वह सनातन धर्म से जोड़ते हैं, जबकि तिरंगा देश की एकता का प्रतीक होगा.
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठान नहीं है. सनातन धर्म का मूल सत्य, न्याय, सदाचार, करुणा, त्याग और धर्म के मार्ग पर चलने में निहित है. यह यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी और किसी धर्म, संप्रदाय या व्यक्ति के विरोध में नहीं होगी.
दिग्विजय सिंह ने कहा कि यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म के मूल्यों के प्रति जागरूकता फैलाना और श्रद्धालुओं की आस्था तथा धार्मिक दान की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को उठाना है. यात्रा के दौरान प्रमुख हिंदू धार्मिक संस्थानों के प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर भी सवाल उठाए जाएंगे.
उज्जैन में वह महाकाल लोक परियोजना से जुड़े मुद्दों, मूर्तियों की गुणवत्ता तथा भूमि से संबंधित कथित अनियमितताओं का विषय उठाएंगे. ओरछा में मंदिर के खातों, संपत्तियों, आभूषणों और दान राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठाए जाएंगे. वहीं, अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े दान, चढ़ावे, भूमि लेनदेन और खर्च में पारदर्शिता की मांग की जाएगी.
दिग्विजय सिंह ने कहा कि राम के नाम पर मिला दान केवल राम के कार्यों में और महाकाल के नाम पर मिला धन केवल महाकाल के कार्यों में इस्तेमाल होना चाहिए.
उन्होंने कहा कि श्रद्धालु की आस्था और उसके दान, दोनों की सुरक्षा होनी चाहिए और यही ‘सनातन स्वाभिमान’ है.
दिग्विजय सिंह ने ‘चंदा चोरी’ और ‘वोट चोरी’ के मुद्दों पर एक डिजिटल याचिका और मिस्ड कॉल अभियान शुरू करने की भी घोषणा की. साथ ही उन्होंने कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच और चुनावी सुधारों की मांग करने की बात कही.
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एएमटी/एबीएम
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