
Bengaluru, 3 नवंबर . कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने Tuesday को राज्य Government पर आरोप लगाया कि उसने दही की कीमतों में भारी बढ़ोतरी करने के बाद, अब मामूली कमी की घोषणा करके जनता के गुस्से को शांत करने की कोशिश की है. उन्होंने दूध और दही की कीमतों में की गई इस बढ़ोतरी को वापस लेने की मांग की.
कर्नाटक के Chief Minister डी.के. शिवकुमार ने Monday को कहा कि उन्होंने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (केएमएफ) को दही की कीमतें कम करने का निर्देश दिया है. साथ ही, उन्होंने हाल ही में दूध की कीमतों में की गई बढ़ोतरी का बचाव करते हुए कहा कि इससे राज्य भर के 11 लाख किसान परिवारों और 25 लाख दूध विक्रेताओं को फायदा होगा.
एक बयान में अशोक ने कांग्रेस Government के उस फैसले पर सवाल उठाया, जिसके तहत पहले दही की कीमत में 14 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई और फिर जनता के कड़े विरोध के बाद इसमें थोड़ी कटौती की घोषणा कर दी गई.
उन्होंने कहा कि यह कैसी जनहितैषी Government है? पहले तो कीमतें बहुत ज्यादा बढ़ा दी जाती हैं, और फिर जनता को धोखा देने के लिए उनमें मामूली कटौती कर दी जाती है. दूध और दही की कीमतों में बढ़ोतरी से आम परिवारों के मासिक बजट पर पहले ही अतिरिक्त बोझ पड़ चुका है. ऐसे समय में, जब लोग जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों से जूझ रहे हैं, उन पर और अधिक आर्थिक बोझ डालना एक जिम्मेदार Government की निशानी नहीं है.
Chief Minister शिवकुमार से मुखातिब होते हुए, अशोक ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करना Government की जिम्मेदारी है. इसके लिए Government को दूध उत्पादकों को उचित प्रोत्साहन देना चाहिए और उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत करना चाहिए.
उन्होंने दावा किया कि पिछली भाजपा Government के दौरान, उपभोक्ताओं पर सीधा आर्थिक बोझ डाले बिना किसानों को प्रोत्साहन दिए गए थे.
उन्होंने सवाल किया कि अगर Government सच में किसानों की चिंता करती है, तो उसे जरूरी प्रोत्साहनों का खर्च खुद उठाना चाहिए. Government अपनी जिम्मेदारी से क्यों भाग रही है और किसानों की मदद करने के नाम पर आम लोगों पर बोझ क्यों डाल रही है?
अशोक ने Chief Minister शिवकुमार की उस टिप्पणी की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि बोतलबंद पानी की कीमत बढ़ने पर कोई सवाल नहीं उठाता. अशोक ने पूछा कि Chief Minister दूध और दही की कीमतों में बढ़ोतरी को सही ठहराने के लिए ऐसा तर्क कैसे दे सकते हैं, जबकि ये चीजें लोगों की रोज़मर्रा की जरूरतें हैं.
उन्होंने कहा कि दही की कीमतों में मामूली कटौती काफी नहीं है. उन्होंने मांग की कि Government दूध की कीमतों में की गई बढ़ोतरी पर भी पुनर्विचार करे और दूध तथा दही, दोनों की कीमतें कम करे.
उन्होंने कहा कि Government को उपभोक्ताओं पर बोझ डालने के बजाय अपने फंड से किसानों को उचित प्रोत्साहन देना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि Government का काम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें राहत देना है.
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डीकेएम/एएस
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