
Bhopal , 24 सितंबर . Madhya Pradesh के उपChief Minister राजेंद्र शुक्ल ने Thursday को साफ किया कि राज्य Government के पैसे से बने मेडिकल कॉलेजों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी संस्थाओं को नहीं सौंपा जाएगा. उनका यह बयान नए बने दमोह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के प्रस्तावित प्रबंधन को लेकर चल रही चर्चा के बीच आया है.
स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि राज्य Government द्वारा बनाए गए और सरकारी पैसे से बनाए जा रहे संस्थानों का संचालन और रखरखाव Government ही करेगी.
उन्होंने कहा, “राज्य Government की ओर से बनाए गए या राज्य Government के पैसे से बनाए जा रहे मेडिकल कॉलेजों का संचालन और रखरखाव राज्य Government ही करेगी. इन मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल के तहत संचालन के लिए नहीं दिया जाएगा.”
उनका यह बयान दमोह मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को पीपीपी मॉडल के जरिए संचालित करने के कथित प्रस्ताव का सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर से ही विरोध होने के बीच आया है.
भाजपा के वरिष्ठ नेता और दमोह विधायक जयंत मलैया ने कहा कि उन्होंने हाल ही में Chief Minister मोहन यादव से मुलाकात की और उनसे अनुरोध किया कि इस संस्थान का संचालन Government खुद करे और इसे किसी निजी संस्था को न सौंपा जाए.
मलैया के मुताबिक, दमोह मेडिकल कॉलेज का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है. इस पर अब तक 350 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं और इसके लिए 30 एकड़ जमीन उपलब्ध है. इसके अलावा उपकरण और फर्नीचर के लिए करीब 45-46 करोड़ रुपए के टेंडर भी फाइनल हो चुके हैं.
उन्होंने सवाल उठाया कि Government की ओर से इतना बड़ा निवेश किए जाने के बाद निजी भागीदारी की जरूरत क्यों है.
मलैया ने कहा, “जनता के पैसे से बना कॉलेज निजी मुनाफे का केंद्र क्यों बने? दमोह की जनता महंगी फीस और महंगे इलाज का बोझ क्यों उठाए?”
दमोह मेडिकल कॉलेज को राज्य में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के विस्तार के तहत विकसित किया जा रहा है. इस परियोजना का उद्देश्य मेडिकल शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के साथ दमोह और आसपास के क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करना है.
मलैया ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या पीपीपी व्यवस्था लागू होने से सरकारी संसाधनों से बने संस्थान में पढ़ाई और इलाज की लागत प्रभावित हो सकती है.
उन्होंने कहा, “Madhya Pradesh Government को जवाब देना चाहिए कि सरकारी संस्थान को निजी हाथों में सौंपने का फैसला आखिर किसके हित में है?”
यह मुद्दा ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो गया है, जब Madhya Pradesh Government राज्य में मेडिकल कॉलेजों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है. खासतौर पर उन जिलों में नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं, जहां उच्च चिकित्सा शिक्षा और विशेष स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच अभी सीमित है.
अब उपChief Minister राजेंद्र शुक्ल ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य Government के पैसों से बने या निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों का संचालन Government ही करेगी और इन्हें पीपीपी मॉडल के तहत निजी संस्थाओं को नहीं सौंपा जाएगा.
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एएमटी/डीकेपी
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