दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन सैन्य कमान सौंपने पर अमेरिका सतर्क

सोल, 21 अक्टूबर . दक्षिण कोरिया को युद्धकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण (ओपकॉन) सौंपने की प्रक्रिया को लेकर अमेरिका सतर्कता बरत रहा है. उसके मुताबिक दोनों देशों के बीच तय शर्तों में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कोरियाई प्रायद्वीप में सुरक्षा खतरों का स्वरूप पहले की तुलना में तेजी से बदल रहा है. हाल ही में दक्षिण कोरिया के President ली जे म्युंग ने युद्धकालीन सैन्य कमान जल्द अपने देश को सौंपने की मांग दोहराई थी.

समाचार एजेंसी योनहाप के अनुसार, अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने Tuesday को कहा, “युद्धकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण के हस्तांतरण की बुनियादी शर्तें पहले जैसी ही हैं, लेकिन क्षेत्र में खतरे का माहौल तेजी से बदल रहा है.” अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया को गठबंधन के सामने मौजूद सभी क्षेत्रीय खतरों को रोकने और उनका मुकाबला करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

अधिकारी की यह टिप्पणी उत्तर कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों में तेजी से हो रही प्रगति को लेकर अमेरिकी चिंताओं के बीच आई है.

अमेरिकी रक्षा विभाग के एक अधिकारी ने भी स्पष्ट किया कि युद्धकालीन सैन्य कमान का हस्तांतरण दोनों देशों के बीच सहमति से तय शर्तों पर आधारित प्रक्रिया है. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह का हस्तांतरण तभी होगा, जब जरूरी शर्तें पूरी हो जाएंगी. अमेरिका इस प्रक्रिया के अंतिम फैसले या परिणाम को लेकर पहले से कोई निष्कर्ष नहीं निकालना चाहता.

दक्षिण कोरिया के President ली जे म्युंग ने Monday को कहा, “युद्धकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण जल्द दक्षिण कोरिया को वापस मिलना चाहिए. सोल क्षमतावान है और इस दिशा में अमेरिका के साथ बातचीत भी आगे बढ़ रही है.”

ली प्रशासन की कोशिश है कि 2030 में President का कार्यकाल समाप्त होने से पहले यह प्रक्रिया पूरी हो जाए. हालांकि, हस्तांतरण की समयसीमा और इसके लिए जरूरी मानकों को लेकर दोनों सहयोगी देशों के बीच मतभेद उभरते दिखाई दे रहे हैं.

अमेरिकी सेना की दक्षिण कोरिया में तैनात कमान के प्रमुख जनरल जेवियर ब्रनसन ने पिछले सप्ताह वाशिंगटन में कहा था कि परिस्थितियां बदल गई हैं. उन्होंने उत्तर कोरिया के हालिया मिसाइल परीक्षणों का उल्लेख करते हुए संकेत दिया था कि सैन्य कमान के हस्तांतरण के लिए नए मानकों की जरूरत पड़ सकती है.

इसके बाद दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय की प्रवक्ता चुंग बिन-ना ने कहा था कि यदि हस्तांतरण की शर्तें लगातार बदलती रहेंगी, तो इस लक्ष्य को हासिल करना कभी संभव नहीं हो पाएगा. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देश पहले से तय शर्तों के आधार पर इस मुद्दे पर समन्वय बनाए हुए हैं.

युद्धकालीन सैन्य कमान का मुद्दा अमेरिका-दक्षिण कोरिया रक्षा गठबंधन के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है. कोरियाई युद्ध (1950-1953) के दौरान दक्षिण कोरिया ने युद्धकालीन अभियान नियंत्रण अमेरिका के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र कमान को सौंप दिया था. वर्ष 1978 में इसे अमेरिका और दक्षिण कोरिया की संयुक्त सेनाओं की कमान के अधीन कर दिया गया.

दक्षिण कोरिया ने 1994 में शांतिकालीन सैन्य अभियान नियंत्रण वापस हासिल कर लिया था, लेकिन युद्धकालीन नियंत्रण अब भी अमेरिकी सेना की दक्षिण कोरिया में तैनात कमान के प्रमुख के नेतृत्व वाली संयुक्त सेनाओं के पास है.

दोनों देशों के बीच अब इस बात पर चर्चा जारी है कि युद्धकालीन सैन्य नियंत्रण दक्षिण कोरिया को कब और किन शर्तों के तहत सौंपा जाए.

–

केआर/