
हैदराबाद, 9 सितंबर . तेलंगाना Government ने Monday को विधानसभा के प्रवेश द्वार पर हुई घटनाओं की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं. इन घटनाओं में विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां और बीआरएस विधायकों तथा Police के बीच हुई झड़प शामिल है.
विधानसभा में इसकी घोषणा करते हुए Chief Minister ए रेवंत रेड्डी ने कहा कि यह घटनाक्रम India राष्ट्र समिति (बीआरएस) द्वारा रची गई एक साजिश का हिस्सा था.
Chief Minister ने कहा कि कानून के अनुसार न केवल साजिश रचने वालों, बल्कि इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने कहा कि Government ने फैसला किया है कि किसी भी व्यक्ति को, चाहे उसका कितना भी बड़ा पद या प्रभाव क्यों न हो, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत जांच कर दोषी पाए जाने पर दंडित किया जाएगा. आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे और दोषियों को सजा दिलाई जाएगी.
रेवंत रेड्डी ने कहा कि Government विधानसभा अध्यक्ष गद्दम प्रसाद कुमार के साथ मजबूती से खड़ी है. उन्होंने अध्यक्ष से कठिन समय में मजबूत बने रहने की अपील की.
बीआरएस के दो विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) को जमानत मिलने का जिक्र करते हुए Chief Minister ने कहा कि आरोपी कानूनी प्रावधानों का लाभ लेकर जमानत पाने में सफल हो सकते हैं, लेकिन तेलंगाना समाज ऐसी ताकतों को स्वीकार नहीं करेगा.
Chief Minister ने विपक्ष के नेता के चंद्रशेखर राव (केसीआर) पर आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी पार्टी के विधायकों को दलित नेताओं और विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ भड़काया. विधानसभा अध्यक्ष का अपमान पूरे तेलंगाना का अपमान है. उनके अनुसार, बीआरएस विधायकों ने केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि मातृत्व और समाज की मूल भावनाओं का भी अपमान किया.
रेवंत रेड्डी ने कहा, “हमारा समाज महिलाओं को शक्ति का स्वरूप मानता है. हम India को India माता और राज्य को तेलंगाना तल्ली कहते हैं. विपक्षी विधायक ऐसे अंदाज में बोले, जिससे अध्यक्ष को आहत करने का प्रयास किया गया.”
Chief Minister ने कहा कि लोगों को उम्मीद थी कि केसीआर विधानसभा अध्यक्ष से माफी मांगेंगे, अपने विधायकों से भी माफी मंगवाएंगे और सदन को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग करेंगे, लेकिन इसके बजाय बीआरएस विधायक आक्रामक हो गए.
उन्होंने कहा कि दलित समुदाय के लोगों ने केसीआर के फार्महाउस तक ढोल बजाकर विरोध मार्च निकाला और लोकतांत्रिक तरीके से धरना दिया. प्रदर्शनकारियों ने किसी भी प्रकार की हिंसा नहीं की. Chief Minister ने सवाल उठाया कि केसीआर ने प्रदर्शनकारियों को बुलाकर उनकी बात क्यों नहीं सुनी. केसीआर को प्रतिनिधियों से बातचीत करनी चाहिए थी और जिम्मेदारी से व्यवहार करना चाहिए था.
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एएमटी/एबीएम
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