तेजस्वी का सरकार पर हमला; बिहार में पुलिस राज का आरोप, आरक्षण को लेकर मांझी, चिराग पर साधा निशाना

Patna, 1 सितंबर . राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने Tuesday को एनडीए Government पर बिहार में Policeिया अत्याचार बढ़ने और आरक्षण के मुद्दे पर पिछड़े, दलित एवं वंचित वर्गों के साथ न्याय नहीं करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि बिहार को Police राज्य बनाने की कोशिश की जा रही है, जिसे राजद किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगा.

Patna में आयोजित प्रेस वार्ता में तेजस्वी यादव ने वैशाली के एक पत्रकार का मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि जनसमस्याओं और बदहाल सड़कों को लेकर सवाल उठाने के कारण उन्हें Police प्रताड़ना का सामना करना पड़ा. प्रेस वार्ता में उपस्थित पीड़ित पत्रकार ने आरोप लगाया कि 29 अगस्त की देर रात थाना प्रभारी राकेश कुमार Police बल के साथ उनके घर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गए.

उन्होंने दावा किया कि Police ने उन पर रिवाल्वर तान दी और उनकी मां, बहन तथा भाई के साथ अभद्रता और मारपीट की. इसके बाद उन्हें जबरन थाने ले जाया गया और रात में दूसरे थाने भेज दिया गया. पत्रकार के मुताबिक, अगले दिन सादे कपड़ों में Policeकर्मियों ने उन पर अलग-अलग मामलों में संलिप्तता स्वीकार करने का दबाव बनाया. उन्होंने आरोप लगाया कि हत्या के मामले में कबूलनामा कराने तथा उनके घर से देसी कट्टा और कारतूस बरामद होने की बात स्वीकार करने के लिए उन्हें बुरी तरह पीटा गया. उन्होंने किसी भी आरोप को स्वीकार करने से इनकार कर दिया. उन्होंने दावा किया कि बाद में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर अदालत में पेश किया गया, लेकिन गिरफ्तारी और बरामदगी से जुड़े Police के साक्ष्यों पर सवाल उठे. अदालत ने उन्हें बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया.

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई स्थानीय विधायक और बिहार Government के मंत्री लखेंद्र पासवान के दबाव में की गई. उन्होंने कहा कि दोषी Police अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो राजद वैशाली बंद कराने के लिए मजबूर होगा. उन्होंने दरभंगा, गायघाट और सीतामढ़ी की घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए Police की कार्यशैली पर सवाल उठाए. प्रेस वार्ता के दूसरे हिस्से में तेजस्वी यादव ने आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए एनडीए के सहयोगी दलों पर निशाना साधा.

उन्होंने कहा कि जीतन राम मांझी, चिराग पासवान, उपेंद्र कुशवाहा और जनता दल यूनाइटेड के नेता आरक्षण का Political लाभ तो लेते हैं, लेकिन आरक्षण के संरक्षण और विस्तार के समय चुप्पी साध लेते हैं. तेजस्वी ने कहा कि महागठबंधन Government के दौरान जातीय गणना कराकर आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 75 प्रतिशत की गई थी और इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई थी, लेकिन केंद्र Government ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया.

उन्होंने मांग की कि यदि एनडीए के सहयोगी वास्तव में आरक्षण के पक्षधर हैं तो आरक्षण की सीमा बढ़ाकर 85 प्रतिशत करने का नया कानून बनाया जाए और उसे नौवीं अनुसूची में शामिल कराया जाए. उन्होंने कहा कि देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों, उच्च न्यायालयों और केंद्र Government के मंत्रालयों में एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व उनकी आबादी के अनुपात में नहीं है.

तेजस्वी ने कहा कि जब इन वर्गों की आबादी देश की बड़ी हिस्सेदारी है, तो शीर्ष संवैधानिक और प्रशासनिक पदों पर उनका प्रतिनिधित्व इतना कम क्यों है. उन्होंने कहा कि जातीय गणना के आंकड़ों का वास्तविक औचित्य तभी है, जब उसके आधार पर भूमिहीन, गरीब, कमजोर और वंचित वर्गों के लिए ठोस नीतियां बनाई जाएं.

तेजस्वी ने कहा कि सामाजिक न्याय केवल चुनावी मुद्दा नहीं होना चाहिए. जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी के सिद्धांत के आधार पर आरक्षण और अवसरों का विस्तार किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आरक्षण को लेकर दिखावटी और अवसरवादी राजनीति अब नहीं चलेगी.

एमएनपी/पीएम