
New Delhi, 9 सितंबर . Prime Minister Narendra Modi की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने रेलवे की तीन महत्वपूर्ण मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है. करीब 10,783 करोड़ रुपए की लागत वाली इन परियोजनाओं से पश्चिम बंगाल, Jharkhand, Odisha, Madhya Pradesh और छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का विस्तार होगा तथा माल और यात्री परिवहन को नई गति मिलेगी.
Prime Minister Narendra Modi ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि कैबिनेट के इस फैसले से पांच राज्यों में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और विशेष रूप से विरासत एवं वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से रेलवे नेटवर्क का विस्तार होने के साथ-साथ लाखों लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा.
कैबिनेट द्वारा स्वीकृत परियोजनाओं में खड़गपुर – झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी रेल लाइन, कटनी – पेंड्रा रोड चौथी रेल लाइन, बिलासपुर (उसलापुर) – पेंड्रा रोड तीसरी रेल लाइन शामिल हैं. इन परियोजनाओं को वर्ष 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है.
बताया गया कि बढ़ी हुई लाइन क्षमता से आवागमन में उल्लेखनीय सुधार होगा, जिसके परिणामस्वरूप भारतीय रेल की प्रचालनगत दक्षता और सेवा विश्वसनीयता में वृद्धि होगी. इन बहु-ट्रैकिंग प्रस्तावों से परिचालन सुव्यवस्थित होगा और भीड़भाड़ में कमी आएगी. ये परियोजनाएं Prime Minister नरेन्द्र मोदी के नए India के विजन के अनुरूप हैं. इनका उद्देश्य क्षेत्र के व्यापक विकास के माध्यम से इस क्षेत्र के लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे उनके रोजगार/स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे.
ये परियोजनाएं Prime Minister गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टीमॉडल-कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाना है. इन परियोजनाओं से लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित होगी.
पश्चिम बंगाल, Jharkhand, Odisha, Madhya Pradesh और छत्तीसगढ़ राज्यों के 14 जिलों को कवर करने वाली इन तीन परियोजनाओं से भारतीय रेलवे के वर्तमान नेटवर्क में लगभग 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी. प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 4,790 गांवों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिनकी आबादी लगभग 56 लाख है.
प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा, जिनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर (झारसुगुड़ा के पास स्थित प्राचीन मंदिर), बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल, रतनपुर महामाया मंदिर आदि शामिल हैं.
प्रस्तावित परियोजनाएं कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात आदि जैसी वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्यक रूट हैं. क्षमता वृद्धि कार्यों से प्रति वर्ष 27 मिलियन टन (एमटीपीए) माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता प्राप्त होगी. पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा कुशल परिवहन माध्यम होने के कारण जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश की लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने में रेलवे सहायक होगा. साथ ही, इससे तेल आयात (लगभग 12 करोड़ लीटर) में कमी आएगी और कार्बनडाईऑक्साइड उत्सर्जन (लगभग 62 करोड़ किलोग्राम) घटेगा, जो 2.48 करोड़ वृक्षारोपण के बराबर है.
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एएमटी/डीकेपी
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