ताशकंद में राघव चड्ढा ने लाल बहादुर शास्त्री को दी श्रद्धांजलि, शास्त्री स्ट्रीट पर पहुंचकर किया नमन

ताशकंद, 7 सितंबर . उज्बेकिस्तान के दौरे पर पहुंचे BJP MP राघव चड्ढा ने Monday को India के पूर्व Prime Minister और देश के महान नेताओं में शुमार लाल बहादुर शास्त्री को ताशकंद में श्रद्धांजलि अर्पित की. राघव चड्ढा यहां समरकंद में आयोजित 12वीं आईपीयू ग्लोबल कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के बाद ताशकंद पहुंचे थे. उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल का दौरा किया और पूर्व Prime Minister की स्मृति में बने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया.

राघव चड्ढा ने इस दौरान उस सड़क का भी दौरा किया, जिसका नाम India के पूर्व Prime Minister के सम्मान में ‘शास्त्री स्ट्रीट’ रखा गया है. उन्होंने सड़क पर चलते हुए लाल बहादुर शास्त्री की स्मृतियों को याद किया और India तथा उज्बेकिस्तान के बीच ऐतिहासिक संबंधों में उनके योगदान को भी रेखांकित किया. लाल बहादुर शास्त्री का ताशकंद से गहरा ऐतिहासिक संबंध रहा है. जनवरी 1966 में ताशकंद में ही उनका निधन हुआ था.

India और Pakistan के बीच 1965 के युद्ध के बाद शांति प्रयासों के तहत हुए ताशकंद समझौते के दौरान शास्त्री तत्कालीन सोवियत संघ के ताशकंद शहर में मौजूद थे. उनके निधन के बाद यह शहर उनके जीवन और Political विरासत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मृति के तौर पर India के लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है. ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री की स्मृति को संरक्षित रखने के लिए स्मारक के साथ-साथ उनके नाम पर सड़क भी मौजूद है.

इसके अलावा वर्ष 1995 में ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री सेंटर फॉर इंडियन कल्चर की स्थापना की गई थी. यह केंद्र India और उज्बेकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने तथा भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. राघव चड्ढा ने ताशकंद में शास्त्री जी की स्मृति को सम्मान दिए जाने को India के लिए गौरव का क्षण बताया. उन्होंने कहा कि दशकों बाद भी उज्बेकिस्तान में लाल बहादुर शास्त्री को जिस सम्मान और श्रद्धा के साथ याद किया जाता है, वह दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है.

साल 2026 लाल बहादुर शास्त्री के ताशकंद में निधन के 60 वर्ष पूरे होने का वर्ष भी है. ऐसे में राघव चड्ढा का ताशकंद स्थित शास्त्री स्मारक पहुंचना विशेष महत्व रखता है. इस अवसर पर उन्होंने शास्त्री जी के व्यक्तित्व और उनके आदर्शों को याद करते हुए कहा कि उनकी सादगी, ईमानदारी, दृढ़ इच्छाशक्ति और कर्तव्य के प्रति समर्पण आज भी देश की नई पीढ़ियों को प्रेरणा देता है. लाल बहादुर शास्त्री ने बेहद साधारण जीवन जीते हुए देश के सर्वोच्च Political पद तक पहुंचकर अपनी अलग पहचान बनाई. उनका ‘जय जवान, जय किसान’ का संदेश आज भी देश के सामाजिक और Political जीवन में व्यापक रूप से याद किया जाता है.

ताशकंद में उनकी स्मृतियों से जुड़े स्थान India और उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक रिश्तों की महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं. राघव चड्ढा का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब India और उज्बेकिस्तान के बीच Political, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को लगातार मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है. शास्त्री स्मारक पर श्रद्धांजलि देकर उन्होंने न केवल पूर्व Prime Minister की विरासत को याद किया बल्कि दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक संबंधों के महत्व को भी रेखांकित किया.

पीकेटी/पीएम