
कोयंबटूर, 24 अगस्त . मेट्टुपालयम के पास थेक्कम्पट्टी गांव के किसानों की ओर से तमिलनाडु Government से हाथियों के लिए प्रस्तावित ‘रिजूवनेशन कैंप’ (पुनर्वास शिविर) की जगह बदलने की अपील की गई है. किसानों की ओर से चेतावनी दी गई है कि भवानी नदी के किनारे इस कैंप को फिर से शुरू करने से सूखे से प्रभावित इस इलाके में इंसानों और हाथियों के बीच टकराव और बढ़ सकता है.
हाल ही में हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती मंत्री ने विधानसभा में घोषणा की थी कि थेक्कम्पट्टी में कैंप को फिर से शुरू करने के लिए 3 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. मंदिर और मठ के हाथियों के लिए आयोजित होने वाला यह सालाना कार्यक्रम पिछले पांच वर्षों से इस जगह पर नहीं हुआ है.
थेक्कम्पट्टी और नेल्लीथुराई पंचायतों के किसानों की ओर से इस प्रस्ताव का विरोध किया गया है. उनका कहना है कि चुनी गई जगह जंगली हाथियों के पारंपरिक आवागमन के रास्ते (माइग्रेशन कॉरिडोर) में आती है. इस इलाके में पानी के ऐसे स्रोत भी हैं जहां जंगल से गुजरने वाले हाथियों के झुंड अक्सर आते-जाते रहते हैं. उन्हें डर है कि कैंप से जुड़ी निर्माण गतिविधियों, अस्थायी बाड़ों और इंसानी हलचल बढ़ने से हाथियों के तय रास्तों में रुकावट आ सकती है और उनके लिए पानी तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है.
इससे जंगली हाथी दूसरे रास्तों की तलाश में पास की बस्तियों और खेती वाले इलाकों में आ सकते हैं. जिन गांवों पर असर पड़ने की आशंका है, उनमें थेक्कम्पट्टी, दासानूर, एनजी पुदुर, आरजी पुदुर, थोट्टादासानूर, नेल्लीथुराई और किट्टमपालयम शामिल हैं. इन इलाकों के किसान पहले से ही जंगल से भटककर आने वाले हाथियों द्वारा फसल बर्बाद करने और कभी-कभी निवासियों पर हमले की शिकायत करते रहे हैं.
एक और बड़ी चिंता यह है कि कैंप के प्रजनन के मौसम (ब्रीडिंग सीजन) के दौरान आयोजित होने की उम्मीद है और इसमें मुख्य रूप से मंदिर की मादा हाथियों को रखा जाएगा. किसानों को डर है कि उनकी मौजूदगी में जंगली नर हाथी कैंप और आसपास के खेतों में आ सकते हैं.
प्रस्तावित जगह के आसपास के खेत पहले से ही सूखे की स्थिति के कारण बुरी तरह प्रभावित हैं. किसानों का कहना है कि हाथियों की आवाजाही बढ़ने से और नुकसान हो सकता है जबकि खराब हुई फसलों के लिए मुआवजा अक्सर देर से मिलता है या अपर्याप्त माना जाता है. कैंप के कारण थेक्कम्पट्टी-वनपाथिराकाली अम्मन मंदिर रोड पर भी ट्रैफिक जाम हो सकता है, क्योंकि वहां आने वाले लोग, गाड़ियां और सड़क किनारे अस्थायी दुकानें लगाने वाले लोग जमा होंगे.
लोगों को डर है कि ट्रैफिक बढ़ने से स्थानीय लोगों की आवाजाही में दिक्कत हो सकती है और आपातकालीन सेवाओं में भी परेशानी आ सकती है. पहले भी जंगली हाथियों के कैंप में घुसने और वहां बंधे हाथियों व महावतों का सामना करने की घटनाएं हुई हैं, जिससे चिंता और बढ़ गई है.
किसानों की ओर से Government और वन विभाग से मांग की गई है कि वे कार्यक्रम को फिर से शुरू करने से पहले विस्तृत पारिस्थितिक और सुरक्षा संबंधी जांच करें और हाथियों के कॉरिडोर, गांवों और खेती वाली जमीन से दूर किसी दूसरी जगह की पहचान करें.
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एसडी/पीएम
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