तमिलनाडु में हर दिन औसतन 12 बच्चों का अपहरण होता है: पूर्व आईजी पोन मनिकवेल

चेन्नई, 4 सितंबर . पूर्व आईजी पोन मनिकवेल का आरोप है कि तमिलनाडु में हर दिन औसतन 12 बच्चों का अपहरण होता है. उन्होंने Chief Minister की सुरक्षा व्यवस्था कम करने और उन संसाधनों का इस्तेमाल बच्चों की सुरक्षा के लिए करने की मांग की है.

Police के पूर्व इंस्पेक्टर जनरल पोन मनिकवेल ने सेलम में पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि पिछले दशक में तमिलनाडु में बच्चों के अपहरण और नवजात शिशुओं की चोरी की घटनाएं चिंताजनक स्तर तक बढ़ गई हैं.

उन्होंने कहा कि बच्चों की तस्करी एक गंभीर अपराध है जो समाज की नींव पर ही चोट करता है. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु Government को सिर्फ दर्ज अपराधों और सुलझाए गए मामलों के आंकड़े बताने के बजाय, उन अपराधों की संख्या भी बतानी चाहिए जिनका पता नहीं चल पाया है और उनके नतीजों के बारे में भी बताना चाहिए.

पोन मनिकवेल ने आरोप लगाया कि चेन्नई और दूसरे बड़े शहरों में बच्चों के अपहरण की घटनाएं ज्यादा होती हैं, और उन्होंने Police विभाग पर ऐसे मामलों को पूरी तरह छिपाने का आरोप लगाया.

उन्होंने दावा किया कि अगवा किए गए बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है, जबकि लड़कियों को अलग-अलग तरह के शोषण में धकेल दिया जाता है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ बच्चों को नशीले पदार्थ दिए जाते हैं, जबकि अगवा किए गए लड़कों को भविष्य में चोर और लुटेरा बनने की ट्रेनिंग दी जाती है.

पोन मनिकवेल ने कहा कि मैं यह बात एक फिल्म डायरेक्टर के तौर पर नहीं, बल्कि Police के पूर्व आईजी के तौर पर कह रहा हूं.

उन्होंने 2017 से लापता या अगवा हुए बच्चों (जिनमें नवजात शिशु और 18 साल तक की लड़कियां शामिल हैं) के साल-दर-साल आंकड़े पेश किए और उन बच्चों की संख्या पर जोर दिया जिनका पता नहीं चल सका.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारी और चैरिटेबल अस्पताल उन जगहों में शामिल हैं जहां से बड़ी संख्या में लड़कियों का अपहरण किया जा रहा है. उनके अनुसार, तमिलनाडु में हर दिन औसतन 12 बच्चों का अपहरण होता है.

पोन मनिकवेल ने Government से आग्रह किया कि बच्चों के अपहरण और तस्करी को पूरे समाज के खिलाफ अपराध माना जाए.

उन्होंने Chief Minister की सुरक्षा व्यवस्था, जिसमें सुरक्षा काफिला और अन्य सुविधाएं शामिल हैं, पर जनता के पैसे के भारी खर्च की भी आलोचना की.

उन्होंने कहा कि Chief Minister की भव्य सुरक्षा व्यवस्था पर टैक्स देने वालों का करोड़ों रुपया खर्च किया जा रहा है. लेकिन अस्पतालों में नवजात शिशुओं के लिए न्यूनतम सुरक्षा भी नहीं है. Government को Chief Minister की जरूरत से ज्यादा सुरक्षा व्यवस्था को कम करना चाहिए और उन संसाधनों का इस्तेमाल बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए करना चाहिए.

एमएस/