
चेन्नई, 1 नवंबर . तमिलनाडु Government महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों को रोकने ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ितों को समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए लगातार कई कदम उठा रही है.
इसी क्रम में पूरे तमिलनाडु में लंबित पोक्सो मामलों की स्थिति की समीक्षा के लिए आयोजित एक बैठक में Chief Minister सी. जोसेफ विजय ने पोक्सो मामलों के विवरण, उनकी वर्तमान स्थिति और केवल पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए आवश्यक अतिरिक्त न्यायालयों के बारे में विस्तार से जानकारी ली.
समीक्षा के आधार पर Chief Minister ने निर्देश दिया कि इन मामलों की सुनवाई में तेजी लाने, दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाने और सभी जिलों में पोक्सो न्यायालय स्थापित करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं.
राज्य में ‘प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (पोक्सो) एक्ट, 2012’ के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए पहले से ही 22 विशेष न्यायालय काम कर रहे हैं और 4 अन्य विशेष न्यायालय जल्द ही शुरू होने वाले हैं. लंबित मामलों की संख्या को देखते हुए Chief Minister के निर्देशों के अनुसार, 46.59 करोड़ रुपये की लागत से कुल 26 नए विशेष न्यायालय (12 नए विशेष न्यायालय और 14 अतिरिक्त विशेष न्यायालय) स्थापित करने का सरकारी आदेश जारी किया गया है.
इसके माध्यम से तमिलनाडु के 47 Police जिलों में कुल 52 विशेष न्यायालय पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत दर्ज मामलों की तेजी से सुनवाई करेंगे. इससे पीड़ितों को न्याय मिलेगा और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जा सकेगी, ताकि भविष्य में ऐसे जघन्य अपराधों की पुनरावृत्ति को रोका जा सके.
इसके अलावा, तमिलनाडु Government “नशा-मुक्त तमिलनाडु” अभियान के तहत नशीले पदार्थों की तस्करी और उनके इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठा रही है. साथ ही, ‘नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट’ (एनडीपीएस एक्ट) के तहत दर्ज मामलों का कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जल्द से जल्द निपटारा करने का प्रयास भी किया जा रहा है.
वर्तमान में तमिलनाडु में 11 विशेष अदालतें काम कर रही हैं. इस कानून के तहत लंबित सभी मामलों का जल्द निपटारा करने की आवश्यकता को देखते हुए Chief Minister के आदेश पर राज्य Government ने 4 नई विशेष अदालतें स्थापित करने का आदेश जारी किया है. इनमें कांचीपुरम, तिरुवल्लुर और वेल्लोर में एक-एक विशेष अदालत और चेन्नई में एक अतिरिक्त विशेष अदालत शामिल है. इस कदम से उक्त कानून के तहत लंबित मामलों का तेजी से निपटारा करने, न्यायिक प्रक्रियाओं को और मजबूत बनाने तथा “नशा-मुक्त तमिलनाडु” बनाने के सरकारी लक्ष्य की दिशा में काम जारी रखने में मदद मिलेगी.
–
ओपी/एएस
Skip to content