तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड चेन्नई में 60 केंद्रों से दिवाली पर होने वाले शोर की करेगा निगरानी

चेन्नई, 28 सितंबर . तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (टीएनपीसीबी) आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर एक स्टडी के तहत, दिवाली के दौरान चेन्नई के 15 जोन में लगाए गए 60 स्टेशनों की मदद से शहर भर में शोर के स्तर की निगरानी करेगा.

इस निगरानी से बोर्ड को लंबे समय तक एक ही जगह पर इकट्ठा किए गए आंकड़ों के साथ-साथ त्योहार के दौरान होने वाले शोर की भी जांच करने में मदद मिलेगी.

पिछले साल हर जोन में कम कीमत वाले सेंसर वाले चार स्टेशन लगाए गए थे. उन्होंने मार्च से दिसंबर 2025 तक दिन और रात के समय आस-पास के शोर के लेवल को रिकॉर्ड किया.

टीएनपीसीबी ने अब अवलोकन (ऑब्जर्वेशन) की अवधि को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है, जिससे इस साल की दिवाली भी इस स्टडी के दायरे में आ गई है.

टीएनपीसीबी के एक अधिकारी ने कहा कि त्योहार के दौरान चेन्नई में बहुत अधिक शोर होता है, इसलिए इस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है.

अधिकारी ने कहा, “हमने अवलोकन की अवधि को एक और साल के लिए बढ़ा दिया है. सेंसर दिवाली के दौरान भी शोर के लेवल पर नजर रखेंगे. चेन्नई में त्योहार के दौरान बहुत अधिक शोर होता है, इसलिए यहां सख्त निगरानी की जरूरत है.”

सितंबर 2024 में बोर्ड ने दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में शोर के लेवल का पता लगाने के लिए आईआईटी मद्रास के साथ साझेदारी की थी.

इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चेन्नई को चुना गया था और इसके सेंसर शहर के किसी एक हिस्से तक सीमित न रखकर सभी जोन में लगाए गए थे.

अधिकारी ने बताया कि चेन्नई में हुए अध्ययन के बाद टीएनपीसीबी दूसरे शहरों में भी सेंसर लगाने पर विचार कर रहा है. जिन शहरों पर विचार किया जा रहा है, उनमें कोयंबटूर, तिरुचिरापल्ली और सलेम शामिल हैं.

पर्यावरणविदों ने त्योहार के दौरान भी मॉनिटरिंग जारी रखने के फैसले का स्वागत किया, लेकिन बोर्ड से हर स्टेशन की रीडिंग पब्लिश करने की अपील की.

उन्होंने कहा कि सभी अवलोकन की जानकारी मिलने से लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि अलग-अलग जगहों पर शोर का स्तर कैसे बदलता है और क्या मॉनिटरिंग से पूरे चेन्नई के हालात का सही पता चलता है.

‘पूवुलागिन नानबार्गल’ के जी. सुंदरराजन ने कहा कि सेंसर की सटीकता पर भी ध्यान देने की जरूरत है. इसके अलावा, सेंसर के कैलिब्रेशन की भी जांच होनी चाहिए. जो डेटा जारी किया जाए, वह पूरे शहर का प्रतिनिधित्व करने वाला होना चाहिए, न कि सिर्फ कुछ जगहों का.”

इस बढ़े हुए अध्ययन में त्योहार के दौरान ली गई रीडिंग को भी उन मापों के साथ जोड़ा जाएगा जो 2025 में दस महीनों के दौरान पहले ही लिए जा चुके हैं.

पर्यावरणविदों का कहना है कि ये रीडिंग शहर में शोर की सही तस्वीर पेश करेंगी या नहीं, यह सेंसर की क्वालिटी और सभी 60 जगहों से डेटा जारी किए जाने पर निर्भर करेगा.

केंद्र-वार आंकड़ा और कैलिब्रेशन की जांच की उनकी मांग, शहर भर में मॉनिटरिंग जारी रखने की बोर्ड की योजना के साथ ही आई है.

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ओपी/पीएम