
चेन्नई, 2 नवंबर . तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई ने राज्य के GST कलेक्शन को लेकर टीवीके Government पर निशाना साधा है. उन्होंने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि पिछले 6 महीनों के आंकड़े राज्य की अर्थव्यवस्था और Government की वित्तीय प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
अन्नामलाई ने लिखा, पिछले 6 महीनों में तमिलनाडु के GST कलेक्शन के आंकड़े राज्य की अर्थव्यवस्था, Government की वित्तीय प्राथमिकताओं और टीवीके Government की लगातार राजस्व जुटाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं. थोड़ी राहत की बात यह है कि अक्टूबर में GST राजस्व में आखिरकार बढ़ोतरी दिखी. हालांकि यह अभी भी सिंगल डिजिट यानी 10 प्रतिशत से कम में ही है.
उन्होंने कहा कि कई महीनों की गिरावट के बाद यह सिंगल डिजिट वाली बढ़ोतरी और भी चिंताजनक है क्योंकि यह सुधार काफी नहीं लगता. यह स्थिति तब है जब तमिलनाडु में त्योहारी सीजन चल रहा था, स्कूलों में लंबी छुट्टियां थीं, और पर्यटकों की संख्या के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों में भी काफी तेजी आई थी.
भाजपा नेता ने कहा, कृपया पोस्ट-सेटलमेंट राजस्व में हुई बढ़ोतरी को तर्क के रूप में पेश न करें, क्योंकि हम पिछले साल और इस साल के GST राजस्व की तुलना कर रहे हैं, और आईGST सेटलमेंट की प्रक्रिया कोई नई बात नहीं है. कर्नाटक, Maharashtra, Gujarat और Haryana जैसे राज्य, जिनकी आर्थिक गतिविधियां तमिलनाडु के बराबर हैं, लगातार मजबूत GST ग्रोथ दिखा रहे हैं.
अन्नामलाई ने राज्य Government को सुझाव देते हुए कहा कि टीवीके Government को इस बात पर ध्यान देना चाहिए और राज्य का GST राजस्व बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए. इसकी शुरुआत सभी विभागों में Government के कैपिटल एक्सपेंडिचर यानी पूंजीगत व्यय की निगरानी से की जा सकती है. ऐसी आम धारणा है कि पिछले 6 महीनों में राज्य के कई विभागों में पूंजीगत व्यय धीमा हो गया है. इससे वह सर्कुलर इकॉनमी यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था टूट जाती है, जो आमतौर पर सरकारी पूंजीगत व्यय से बनती है.
उन्होंने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु देश में पहले स्थान पर है, जहां India की कुल फैक्ट्रियों का 15.43 प्रतिशत हिस्सा है. हालांकि, जब ग्रॉस वैल्यू एडेड के आधार पर देखा जाता है, तो इसका योगदान 10.26 प्रतिशत है, जिससे यह राष्ट्रीय स्तर पर तीसरे स्थान पर आता है. डेढ़ दशक पहले, राष्ट्रीय मैन्युफैक्चरिंग जीवीए में तमिलनाडु की हिस्सेदारी 10.3 प्रतिशत थी. तब से इसमें कोई खास बदलाव नहीं आया है जबकि जो राज्य कभी तमिलनाडु से पीछे थे, वे अब इस अंतर को लगातार कम कर रहे हैं.
अन्नामलाई ने अंत में कहा कि राज्य योजना आयोग द्वारा तैयार की गई क्षेत्रीय असंतुलन की रिपोर्टें अपने आप राज्य की समस्याओं को हल नहीं कर देंगी. ये रिपोर्टें केवल यह बताती हैं कि हमारा राज्य अभी किस स्थिति में है.
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एससीएच/पीएम
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