
New Delhi, 7 अक्टूबर . डॉ. सुभाष चंद्रा की पर्सनल गारंटी से जुड़े एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लोन मामले में संबंधित कंपनियों ने 100 प्रतिशत बकाया मूलधन के साथ 10 प्रतिशत ब्याज पर सेटलमेंट का प्रस्ताव दिया है. यह जानकारी सूत्रों की ओर से Wednesday को दी गई.
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जिन कंपनियों ने ये कर्ज लिया था, उन्होंने अब कर्ज चुकाने के लिए एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस को सेटलमेंट प्रस्ताव दिए हैं. इसमें संबंधित कंपनियां पूरा पैसा ब्याज सहित चुकाने पर सहमत हैं.
एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से वसंत सागर प्रॉपर्टीज लिमिटेड और पैन इंडिया इंफ्राप्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने 500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था . इनके अलावा डिजिटल सब्सक्राइबर मैनेजमेंट एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड और स्प्रिट इंफ्रापावर प्रोजेक्ट ने भी एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस से 480 करोड़ रुपए का लोन लिया था.
सूत्रों ने आगे बताया कि अब चारों ही कंपनियां ने 100 प्रतिशत मूलधन और 10 प्रतिशत ब्याज के साथ एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड का कर्ज चुकाने का प्रस्ताव पेश किया है. ये वही कंपनियां हैं जिनके कर्ज के संबंध में डॉ सुभाष चंद्रा ने पर्सनल गारंटर की भूमिका निभाई थी.
इससे पहले एनसीएलटी से लोन में 99.97 प्रतिशत का हेयरकट मामले को चंद्रा ने भारी-भरकम व्यक्तिगत कर्ज माफी के तौर पर बताए जाने पर आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से उधारदाताओं से पैसे नहीं लिए थे और वे केवल एसेल ग्रुप से जुड़ी उधार लेने वाली कंपनियों द्वारा लिए गए कर्ज के लिए व्यक्तिगत गारंटर के तौर पर शामिल थे.
चंद्रा ने यह भी कहा था कि 22,006 करोड़ रुपए का आंकड़ा कार्यवाही में दायर क्लेम को दिखाता है और इसे उनका व्यक्तिगत बकाया कर्ज नहीं माना जाना चाहिए.
उनके बयान के अनुसार, 21,696 करोड़ रुपए के क्लेम मंजूर किए गए थे, जबकि भुगतान योजना का विरोध करने वाले उधारदाताओं के कुल क्लेम लगभग 3,992 करोड़ रुपए थे.
इसमें से 620 करोड़ रुपए के क्लेम पहले ही निपटाए जा चुके थे, जिससे लगभग 3,372 करोड़ रुपए की राशि बची थी. उन्होंने आगे कहा कि उधार लेने वाली कंपनियों ने कई आपत्ति जताने वाले उधारदाताओं को लगभग 1,113 करोड़ रुपए का भुगतान करने की पेशकश की थी और बातचीत जारी है.
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एबीएस
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