डीजीसीए के पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर समेत चार कंपनियों पर सीबीआई का केस, पक्षपात करने और आर्थिक लाभ पहुंचाने का आरोप

New Delhi, 4 अक्टूबर . केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने डीजीसीए के पूर्व डायरेक्टर ऑफ फ्लाइंग ट्रेनिंग कैप्टन अनिल गिल, ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, रेडबर्ड एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी लिमिटेड के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

सीबीआई की First Information Report में आरोप लगाया गया है कि कैप्टन अनिल गिल ने कुछ चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (एफटीओ) को अपने आधिकारिक पद का इस्तेमाल कर अनुचित लाभ पहुंचाया. इससे समान स्थिति में काम करने वाले दूसरे ऑपरेटरों को नुकसान और आर्थिक हानि हुई.

First Information Report के मुताबिक, गिल पर अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा संचालित कथित बेनामी और शेल कंपनियों के जरिए बेहद कम कीमत पर ट्रेनिंग विमान खरीदने में मदद करने का आरोप है. बाद में इन विमानों को कथित तौर पर पसंदीदा फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन को काफी ऊंची दरों पर लीज पर दिया गया. आरोप है कि इससे भारी आर्थिक लाभ हासिल किया गया.

जांच में कथित तौर पर कैप्टन गिल के करीबी और अन्य रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित और संचालित कंपनियों का एक नेटवर्क भी सामने आया.

ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड का गठन 2016 में किया गया था. कंपनी में गिल की मां कमलेश गिल और उनकी मौसी संतोष कुमारी निदेशक थीं. बाद में उनके रिश्तेदार विकास नैन और दीपिका गिल भी कंपनी से जुड़े.

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (एमसीए) में बीएजीपीएल की फाइलिंग में कैप्टन गिल का निजी ईमेल पता भी दर्ज था. इसे कंपनी के प्रशासन में उनकी कथित भूमिका से जोड़कर देखा गया.

इसके अलावा साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन आईएफएससी प्राइवेट लिमिटेड में उनके रिश्तेदारों को निदेशक बनाए जाने की बात कही गई है. आरोप है कि ये कंपनियां संपत्तियों की खरीद, वित्तीय व्यवस्था और विमानों को गिरवी रखने जैसी गतिविधियों से जुड़ी थीं.

मामले में विमानों की खरीद और बाद में उन्हें लीज पर देने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. बीएजीपीएल ने 2020 में 1975 मॉडल का सेसना विमान वीटी ईयूसी 10 लाख रुपए में खरीदा था. इसके बाद 2021 में 1981 मॉडल का वीटी एएवाई विमान 37.5 लाख रुपए में खरीदा गया.

आरोप है कि वीटी एएवाई पूरी तरह उड़ान भरने की स्थिति में था और उसके केवल 123 इंजन घंटे थे. इसके बावजूद उसे उसकी अनुमानित बाजार कीमत 75 लाख से एक करोड़ रुपए के मुकाबले काफी कम कीमत पर खरीदा गया.

दोनों विमानों को बाद में रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दिया गया. आरोप है कि इसके लिए कैप्टन गिल ने अपनी आधिकारिक नियामक भूमिका में मंजूरी दी थी. 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच बीएजीपीएल को अकेले रेडबर्ड एविएशन एकेडमी से 2.16 करोड़ रुपए से ज्यादा की लीज राशि मिली.

First Information Report में नियामकीय मंजूरी देने में कथित पक्षपात और प्रक्रियाओं में अनियमितता के आरोप भी लगाए गए हैं. रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को शुरुआती एफटीओ मंजूरी एक महीने और तीन दिन में दी गई, जबकि स्काईनेक्स एयरो प्राइवेट लिमिटेड और जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड जैसी दूसरी कंपनियों को शुरुआती मंजूरी मिलने में चार से छह महीने लगे.

कैप्टन गिल पर सितंबर 2022 में उस चयन समिति की अध्यक्षता करने का भी आरोप है, जिसने उनके रिश्तेदार विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर नियुक्त किया. इसके बाद विकास नैन को रेडबर्ड एविएशन एकेडमी में करीब 6.5 लाख रुपए प्रति माह के वेतन पर नियुक्त किया गया.

कैप्टन गिल पर विमानन गतिविधियों में अपने करीबी रिश्तेदारों की भागीदारी और उनके रोजगार की जानकारी छिपाने का भी आरोप लगाया गया है.

सीबीआई के मुताबिक, शुरुआती तौर पर सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर कैप्टन अनिल गिल, संबंधित कंपनियों, उनके निदेशकों और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों एवं निजी व्यक्तियों के खिलाफ कई धाराओं का मामला बनता है.

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एएमटी/डीकेपी