डीएचएफएल लोन घोटाला: ईडी ने दिल्ली और महाराष्ट्र में 40 करोड़ रुपए की संपत्तियां अटैच कीं

New Delhi, 2 नवंबर . Enforcement Directorate (ईडी) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) और उसके प्रवर्तकों कपिल वाधवान तथा धीरज वाधवान से जुड़े बैंक ऋण धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 40 करोड़ रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं.

अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत ईडी की मुख्यालय जांच इकाई द्वारा की गई है.

ईडी ने बताया कि अटैच की गई संपत्तियों में Maharashtra के रायगढ़ जिले के कर्जत स्थित भूमि के टुकड़े और New Delhi के शांतिनिकेतन क्षेत्र में स्थित एक आवासीय भूखंड शामिल है.

ईडी की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा दर्ज First Information Report के आधार पर शुरू हुई थी. यह First Information Report यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 17 बैंकों के एक समूह की ओर से दायर शिकायत के बाद भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थी.

First Information Report के अनुसार, कपिल वाधवान, धीरज वाधवान और अन्य लोगों ने मिलकर बैंकों के समूह के साथ धोखाधड़ी करने की साजिश रची थी. इन बैंकों ने डीएचएफएल को कुल 42,871 करोड़ रुपए की ऋण सुविधाएं मंजूर की थीं.

ईडी के मुताबिक, डीएचएफएल की लेखा पुस्तकों में कथित हेराफेरी कर ऋण राशि को दूसरी जगह भेजा गया और उसका दुरुपयोग किया गया, जिससे बैंकों के समूह को 34,615 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ.

जांच में यह भी सामने आया कि वाधवान परिवार प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अपने परिजनों, सहयोगियों और कर्मचारियों के जरिए करीब 225 कंपनियों को नियंत्रित करता था.

डीएचएफएल के फोरेंसिक ऑडिट में ऐसी 66 संस्थाओं की पहचान हुई, जो प्रवर्तकों से जुड़ी थीं और जिन्हें 29,100 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण और अग्रिम राशि वितरित की गई थी.

ईडी की जांच में यह भी पता चला कि डीएचएफएल से 11,549 करोड़ रुपए की राशि 87 ऐसी कंपनियों को भेजी गई, जो प्रवर्तकों के नियंत्रण में थीं. इसके लिए एक फर्जी बांद्रा शाखा का इस्तेमाल किया गया.

जांच एजेंसी के अनुसार, इस शाखा के माध्यम से वाधवान समूह की कंपनियों को दी गई बड़ी रकम को लगभग 2.60 लाख फर्जी खुदरा उधारकर्ताओं के नाम पर होम लोन के रूप में दिखाया गया.

ईडी का कहना है कि खुदरा ऋण पोर्टफोलियो को कृत्रिम रूप से बढ़ाकर डीएचएफएल ने बैंकों से और अधिक कर्ज लिया, नियामकीय जांच से बचने की कोशिश की और संबंधित पक्षों के लेनदेन को छिपाया.

ईडी पहले ही Mumbai की विशेष पीएमएलए अदालत में कपिल वाधवान और धीरज वाधवान समेत 17 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल कर चुकी है. इसके बाद पांच अन्य आरोपियों के खिलाफ एक पूरक आरोपपत्र भी दायर किया गया था.

ईडी ने यह भी बताया कि 19 अगस्त 2026 को की गई तलाशी कार्रवाई के दौरान वाधवान परिवार की एक विदेशी संपत्ति की बिक्री से जुड़े 54.1 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 51.75 करोड़ रुपए) की राशि को फ्रीज किया गया था.

जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2018-19 के दौरान डीएचएफएल ने 40.40 करोड़ रुपए की अपराध से अर्जित राशि Mumbai स्थित दो स्वामित्व वाली फर्मों-रिलायबल सर्विसेज और मिलेनियम सर्विसेज को भेजी थी. ये फर्म हर्ष देढ़िया और उनकी पत्नी धारा देढ़िया से जुड़ी बताई गई हैं.

ईडी के अनुसार, यह भुगतान उन सेवाओं के बदले किया गया था जो वास्तव में कभी प्रदान ही नहीं की गई थीं.

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एएमटी/