
भुवनेश्वर, 3 अक्टूबर . Odisha Government ने Saturday को ओलिव रिडले कछुओं पर तीन साल की शोध पहल की पहले वर्ष की रिपोर्ट जारी की. इस अध्ययन का नेतृत्व भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) ने Odisha वन्यजीव संगठन, अदाणी पोर्ट्स की इकाई धामरा पोर्ट कंपनी लिमिटेड (डीपीसीएल) और अदाणी फाउंडेशन के साथ साझेदारी में किया है.
वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने रिपोर्ट जारी की. इसमें सैटेलाइट टेलीमेट्री, नावों के जरिए किए गए सर्वेक्षण और तटरेखा के विश्लेषण को शामिल किया गया है, ताकि यह समझा जा सके कि ओलिव रिडले कछुए Odisha के तटीय जल और घोंसले बनाने वाले क्षेत्रों का किस तरह उपयोग करते हैं.
अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉ. प्रीति अदाणी ने कहा, “ओलिव रिडले Odisha की प्राकृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसकी सुरक्षा के लिए इसके सफर को गहराई से समझना जरूरी है.”
उन्होंने कहा, “हमें डब्ल्यूआईआई के वैज्ञानिक कार्यों को समर्थन देने और संरक्षण के प्रयासों में योगदान करने की खुशी है. Chief Minister मोहन चरण माझी के नेतृत्व में Odisha Government का सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान इस तरह के अग्रणी कार्य के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है और हमें इस प्रयास में योगदान देकर खुशी हो रही है.”
अदाणी फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. अभिषेक लखटकिया ने अदाणी समूह की सामाजिक कल्याण एवं विकास शाखा की ओर से कार्यक्रम में हिस्सा लिया.
अदाणी फाउंडेशन करीब एक दशक से Odisha में काम कर रहा है. इसके कार्यक्रम सात जिलों के 283 गांवों तक पहुंच चुके हैं. फाउंडेशन के कार्यों में शिक्षा और छात्रवृत्ति, वेलनेस सेंटर, मोबाइल मेडिकल यूनिट और विशेष स्वास्थ्य शिविरों के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं तथा किसानों, महिलाओं और युवाओं को समर्थन देने वाले आजीविका कार्यक्रम शामिल हैं.
फाउंडेशन ने सड़कों, पेयजल, स्वच्छता और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी सामुदायिक बुनियादी सुविधाओं के विकास में भी सहयोग दिया है.
Odisha में ओलिव रिडले कछुओं के दुनिया के कुछ सबसे महत्वपूर्ण प्रजनन और अंडे देने वाले स्थल हैं. इनमें केंद्रापड़ा जिले का गहिरमाथा और गंजाम जिले का रुशिकुल्या शामिल हैं, जहां बड़ी संख्या में कछुए एक साथ अंडे देने के लिए पहुंचते हैं. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत संरक्षित इस प्रजाति को India में कानूनी संरक्षण का सर्वोच्च स्तर प्राप्त है.
डब्ल्यूआईआई के संकटग्रस्त प्रजाति प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर. सुरेश कुमार ने कहा कि यह अध्ययन करीब 15 साल बाद Odisha में ओलिव रिडले कछुओं की सैटेलाइट ट्रैकिंग की फिर से शुरुआत को दर्शाता है.
कुमार ने कहा, “Odisha वन विभाग, धामरा पोर्ट और अदाणी फाउंडेशन के साथ साझेदारी ने हमें इन कछुओं की आवाजाही के पैटर्न और उनके आवास के उपयोग के बारे में नई जानकारी हासिल करने में सक्षम बनाया है. ये निष्कर्ष साक्ष्य-आधारित संरक्षण योजना के लिए वैज्ञानिक आधार प्रदान करते हैं. हम अधिक कछुओं की ट्रैकिंग जारी रखेंगे, ताकि एक मजबूत डेटासेट तैयार किया जा सके, जो प्रबंधन रणनीतियों और दीर्घकालिक संरक्षण में मदद कर सके.”
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एबीएस
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