
संयुक्त राष्ट्र, 23 सितंबर . अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप, डेनमार्क की Prime Minister मेटे फ्रेडरिकसेन और ग्रीनलैंड के Prime Minister जेन्स-फ्रेडरिक निल्सन ने एक नए रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते के तहत 1951 के समझौते को अपडेट किया गया है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण आर्कटिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग को बढ़ाया गया है.
ट्रंप ने इस समझौते को लंबी कोशिशों का नतीजा बताया और कहा कि इससे अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच रिश्ते मजबूत होंगे.
ट्रंप ने तीनों देशों के बीच हुए समझौते पर दस्तखत करने के कार्यक्रम में कहा, “हमारे रिश्ते बहुत शानदार और सुरक्षित होंगे, और हम इसका बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “इस पर काफी समय से काम चल रहा था. कुछ लोग सच में यह समझौता करना चाहते थे लेकिन कभी हो नहीं पाया, पर अब हम इसे पूरा कर रहे हैं.”
ट्रंप ने कहा कि यह समझौता ‘यूरोप, अमेरिका और सभी के लिए बहुत बढ़िया’ होगा और ग्रीनलैंड के लिए तो ‘अद्भुत’ साबित होगा.
फ्रेडरिकसेन ने इस समझौते को अमेरिका के साथ डेनमार्क के लंबे समय से चले आ रहे सहयोग में एक अहम पड़ाव बताया.
उन्होंने कहा, “75 साल पहले, हमने ग्रीनलैंड की सुरक्षा को लेकर एक समझौता किया था. आज, हम उससे भी बड़ा और बेहतर समझौता कर रहे हैं, एक ऐसा समझौता जो हमेशा कायम रहेगा.”
डेनमार्क की नेता ने कहा कि इस समझौते से सुरक्षा और प्रतिरोध क्षमता मजबूत होगी और साथ ही विरोधी ताकतों को ग्रीनलैंड में पैर जमाने से रोका जा सकेगा.
फ्रेडरिकसेन ने कहा, “हम यह पक्का कर रहे हैं कि उन्हें ग्रीनलैंड पर कोई नियंत्रण या बड़ा असर डालने की इजाजत न मिले. और हम यह भी पक्का कर रहे हैं कि आर्कटिक में एक ही समय में हमारे और सहयोगी देश भी मौजूद रहें.”
उन्होंने कहा कि इस समझौते में ग्रीनलैंड और नॉर्थ अटलांटिक संधि वाले इलाके की सुरक्षा में अमेरिका के ऐतिहासिक और जारी योगदान को मान्यता दी गई है. उन्होंने कहा कि इसमें डेनमार्क साम्राज्य की क्षेत्रीय अखंडता और ग्रीनलैंड के आत्म-निर्णय के अधिकार का भी सम्मान किया गया है.
फ्रेडरिकसेन ने इस समझौते को भू-Political तनाव के इस दौर में नाटो को मजबूत करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा बताया.
उन्होंने कहा, “अगर हम सहयोगी देशों के तौर पर बंट जाते हैं, तो हम अपने दुश्मनों की मदद करते हैं. हम ऐसा होने से रोकने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे.”
नीलसन ने कहा कि इस समझौते से 1951 का रक्षा समझौता ‘2026 के दौर’ के हिसाब से अपडेट हो गया है और यह पक्का हो गया है कि ग्रीनलैंड के इलाके और वहां के लोगों पर असर डालने वाले फैसलों में ग्रीनलैंड सीधे तौर पर शामिल होगा.
उन्होंने कहा, “ग्रीनलैंड के लिए, यह सिर्फ हमारे बारे में समझौता नहीं है, बल्कि यह हमारे साथ किया गया समझौता है. इसमें ग्रीनलैंड के लोगों, हमारे अधिकारों, हमारी आजीविका और हमारे देश के विकास का ध्यान रखा गया है.” नीलसन ने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध और शीत युद्ध के दौरान ग्रीनलैंड ने सुरक्षा के लिहाज से अहम भूमिका निभाई थी और वह अमेरिका की घरेलू सुरक्षा में भी मदद करता रहा है.
उन्होंने आर्कटिक में सुरक्षा को लेकर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच नाटो और पश्चिमी गठबंधन के प्रति ग्रीनलैंड की प्रतिबद्धता पर भी जोर दिया.
नीलसन ने कहा, “इस समझौते से आज और भविष्य में इस बात को लेकर कोई शक नहीं रह जाना चाहिए कि ग्रीनलैंड की वफादारी किसके साथ है. हम अमेरिका के पक्के दोस्त रहे हैं और आगे भी रहेंगे, साथ ही पश्चिमी गठबंधन का हिस्सा भी बने रहेंगे.”
नीलसन ने इस समझौते को ‘तीनों पक्षों के लिए फायदेमंद’ बताया, जो साझा जिम्मेदारी, आपसी सम्मान और आर्कटिक में शांति बनाए रखने के लक्ष्य पर आधारित है.
ट्रंप ने उस पत्रकार के सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया जिसने पूछा था कि क्या ग्रीनलैंड पर अमेरिका के मालिकाना हक की बात अब खत्म हो गई है. जब उनसे पूछा गया कि ग्रीनलैंड के लोगों के लिए उनका क्या संदेश है, तो ट्रंप ने कहा, “मुझे ग्रीनलैंड के लोग बहुत पसंद हैं.” उन्होंने यह भी कहा कि “उनके Prime Minister उनका बहुत अच्छी तरह से प्रतिनिधित्व करते हैं.”
वॉशिंगटन और कोपेनहेगन के बीच 1951 में हुए रक्षा समझौते ने ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी का आधार तैयार किया था. 2004 में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के बीच हुए एक समझौते के जरिए इसमें बदलाव किए गए थे.
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एससीएच/एएस
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