झारखंड : गुमला के कोबजा गांव में ग्राम सभा का फैसला, ईसाई धर्मगुरुओं के प्रवेश पर रोक

गुमला, 1 नवंबर . Jharkhand के गुमला जिले के रायडीह प्रखंड स्थित कोबजा गांव में ग्राम सभा की बैठक के बाद ईसाई धर्म के पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने का सामूहिक निर्णय लिया गया है. इस फैसले के संबंध में गांव में एक स्थायी बैनर भी लगाया गया है. ग्राम सभा में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल हुए. इस दौरान आदिवासी समुदाय के लोगों के साथ आईआरएस अधिकारी निशा उरांव भी मौजूद रहीं.

ग्राम सभा में शामिल ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में धर्मांतरण की गतिविधियों के कारण उनकी पारंपरिक संस्कृति और धार्मिक पहचान प्रभावित हो रही है. ग्रामीणों का कहना था कि बाहरी धर्मगुरुओं के गांव में आने और लोगों से संपर्क करने के कारण सरना समुदाय के सामने अपनी परंपराओं को बचाए रखने की चुनौती पैदा हो रही है. इसी को लेकर ग्राम सभा में सामूहिक निर्णय लिया गया.

निशा उरांव ने कहा कि धर्मांतरण सरना आदिवासी समुदाय के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. यह क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आता है और यहां पेसा कानून लागू है. उनके अनुसार, इस कानून के तहत ग्राम सभा को कई अधिकार प्राप्त हैं. उन्होंने ग्रामीणों से इन अधिकारों और ग्राम सभा की भूमिका को समझने की अपील की.

उन्होंने कहा कि इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए ग्राम सभा ने ईसाई धर्म के पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय लिया है. ग्राम सभा के बाद निशा उरांव ने ग्रामीणों के साथ मिलकर गांव में प्रतिबंध संबंधी बैनर लगाया.

इस दौरान मौजूद लोगों ने ऐलान किया कि वे गांव में ईसाई धर्मगुरुओं को प्रवेश नहीं करने देंगे. गांव के सरना आदिवासी समुदाय के सदस्य बिशु उरांव ने कहा कि उनके अनुसार क्षेत्र में धर्मांतरण की गतिविधियों से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही है. इसी चिंता के चलते ग्रामीणों ने सामूहिक निर्णय लिया है.

गांव की एक महिला ने भी आरोप लगाया कि धर्मांतरण के साथ-साथ गांव में चर्च बनाने की कोशिश की जा रही है. इससे ग्रामीणों में अपनी सांस्कृतिक पहचान और अस्तित्व को लेकर चिंता है, हालांकि ग्राम सभा के इस फैसले और ईसाई धर्मगुरुओं के प्रवेश पर रोक को लेकर प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक प्रतिक्रिया की जानकारी नहीं मिली है.

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एसएनसी/