
New Delhi, 26 सितंबर . राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार से जुड़े विवाद को लेकर कहा कि यह मामला अब केवल विपक्ष और सत्ताधारी दल के बीच की Political लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि नागरिकों से भी जुड़ा विषय है.
New Delhi में से बातचीत में सीईसी के खिलाफ महाभियोग लाने की विपक्ष की तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल पर मनोज झा ने कहा कि महाभियोग एक विकल्प है और विपक्ष पहले भी इससे संबंधित प्रस्ताव प्रस्तुत कर चुका है. उन्होंने कहा कि इस मामले में Supreme Court में भी याचिकाएं दाखिल हुई हैं और अदालत के पास उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर वह स्वत: संज्ञान ले सकती है. अब इस विषय पर नागरिक भी अपनी रणनीति तय करेंगे. चुनाव को केवल एक चुनावी चक्र के तौर पर नहीं देखा जा रहा है, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता को लेकर उठ रहे सवालों के संदर्भ में देखा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि अब यह मुद्दा केवल विपक्ष तक सीमित नहीं है. एनडीए के कुछ घटक दलों की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं.
Union Minister चिराग पासवान और सांसद उपेंद्र कुशवाहा का नाम लेते हुए राजद सांसद ने कहा कि तेलुगु देशम पार्टी की ओर से भी इस संबंध में बात सामने आई है. उन्होंने आंध्र प्रदेश के प्रमुख विपक्षी नेता जगन मोहन रेड्डी की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया. मनोज झा ने कहा कि इन सवालों को केवल खारिज करके आगे बढ़ने के बजाय गंभीरता से जवाब दिया जाना चाहिए.
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म भूषण दिए जाने की मांग पर भी मनोज झा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि समिक भट्टाचार्य के पास इतना ज्ञान और समझ है तो उन्हें India रत्न मिल जाना चाहिए. उन्होंने सभी खबरें देखी होंगी. किसी खबर का खंडन नहीं. इसके बावजूद मांग कर रहे हैं. इसका मतलब वही है जो लोगों के जेहन में है कि तुम मुझे पद्म भूषण दो, मैं तुम्हें बंगाल दूंगा.
–
डीकेएम/
Skip to content