ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल गांधी का प्रदर्शन ड्रामा, चुनाव आयोग स्वतंत्र संस्था: शायना एनसी

Mumbai , 26 सितंबर . शिवसेना प्रवक्ता शायना एनसी ने चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर एनडीए की बैठक और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने राहुल गांधी की ओर से ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है और उसके फैसलों पर आपत्ति होने पर लोकतांत्रिक तरीके से सवाल उठाए जा सकते हैं.

शायना एनसी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद में महाभियोग की प्रक्रिया होती है. उन्होंने राहुल गांधी के निर्वाचन सदन के बाहर प्रदर्शन और इस्तीफे की मांग को ड्रामा बताया. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग में तीन सदस्य हैं और बहुमत के आधार पर फैसले लिए जाते हैं. किसी फैसले पर आपत्ति होना लोकतंत्र में स्वाभाविक है, लेकिन चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है.

एसआईआर और मतदाता सूची के मुद्दे पर शायना एनसी ने कहा कि साफ और सही मतदाता सूची जरूरी है. मृत लोगों के नाम, डुप्लीकेट मतदाताओं और दूसरे संदिग्ध नामों को हटाने की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष को आपत्ति नहीं करनी चाहिए. यदि किसी नाम या प्रक्रिया पर आपत्ति है तो बीएलओ के माध्यम से उसे दर्ज कराया जाए, न कि गलत नैरेटिव फैलाया जाए.

Maharashtra के 75 प्रतिशत तालुकों को सूखा घोषित किए जाने के सवाल पर शायना एनसी ने कहा कि राज्य में स्थिति गंभीर है. बारिश में करीब 50 प्रतिशत की कमी रही है और लातूर तथा धाराशिव जैसे क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा चुनौतीपूर्ण है. Government किसानों के लिए राहत योजनाओं को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है और कोशिश है कि दिवाली से पहले किसानों को मुआवजा मिल जाए. 56 लाख किसानों के लिए 36 हजार करोड़ रुपए की राहत घोषित की गई है. पिछली बार 2019 की महात्मा फुले योजना में करीब 32 लाख किसान शामिल थे, जबकि इस बार लाभार्थियों की संख्या 56 लाख है.

उन्होंने दावा किया कि लाभार्थियों की सूची तैयार है और 51 हजार किसानों को 381 करोड़ रुपए की क्रेडिट राशि पहले ही मिल चुकी है. Government का उद्देश्य किसानों को किसी तरह की परेशानी से बचाना है.

Prime Minister Narendra Modi के भजन-क्लबिंग कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर विपक्ष की आलोचना पर शायना एनसी ने इसे केवल भजन के नजरिए से देखने से इनकार किया. उन्होंने कहा कि यह संस्कृति, वेलनेस और लोगों के बीच जुड़ाव का विषय है. आज के युवा पारंपरिक तरीके से केवल किसी हॉल में बैठकर प्रवचन सुनना नहीं चाहते. वे खुले माहौल में संगीत और भजन के साथ कार्यक्रमों में शामिल होना पसंद करते हैं. ऐसे कार्यक्रमों में युवाओं के रोजगार और social media के दबाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है.

शायना एनसी ने कहा कि मानसिक शांति के लिए ऐसे आयोजन एक माध्यम बन सकते हैं. नए India के लिए हर कार्यक्रम में मंच या पोडियम जरूरी नहीं है और पार्क जैसे खुले स्थान में होने वाला भजन भी लोगों को सुकून दे सकता है.

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