जोंटी रोड्स की शुभमन गिल को सलाह, कप्तानी करते हुए सीनियर खिलाड़ियों के अनुभव का उठाएं फायदा

New Delhi, 2 सितंबर . साउथ अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर जोंटी रोड्स का मानना है कि India के वनडे कप्तान शुभमन गिल को रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों के अनुभव का फायदा उठाना चाहिए. इसके साथ ही, उन्हें अपनी कप्तानी की शैली और सोच को भी बनाए रखना चाहिए.

रोड्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कप्तानी करना आसान नहीं होता और इसका काफी दबाव होता है. हालांकि, उन्हें भरोसा है कि शुभमन गिल इस चुनौती को अच्छी तरह संभाल सकते हैं और एक सफल कप्तान साबित होंगे. पिछले साल अक्टूबर में रोहित की जगह India का वनडे कप्तान बनने के बाद से गिल ने छह मैच जीते हैं और इतने ही मैच हारे हैं, यानी उनका जीत प्रतिशत 50 रहा है. रोड्स ने ‘जियोस्टार’ के साथ बात करते हुए कहा, “एक लीडर के तौर पर सबसे जरूरी बात यह समझना है कि आपके आस-पास सीनियर खिलाड़ी हैं. अगर आप मदद, राय या आइडिया मांगते हैं, तो यह आपकी कप्तानी के लिए कोई बुरी बात नहीं है.”

साउथ अफ्रीका के पूर्व खिलाड़ी ने आगे कहा, “जाहिर है कि लीडर और कप्तान के तौर पर आखिरी फैसला आपको ही लेना होता है. इतने अनुभवी खिलाड़ियों की कप्तानी करने में अक्सर यही सबसे मुश्किल काम होता है. वे सभी आपको बेहतरीन विकल्प देते हैं, लेकिन फैसला आपको ही करना होता है. इसी कारण रोहित और विराट जैसे खिलाड़ियों का साथ होना और शुभमन का एनर्जी लेवल हमेशा एक जैसा रहा है. कप्तान के तौर पर और उससे पहले एक खिलाड़ी के तौर पर उनका व्यवहार हमेशा एक जैसा रहा है. जब तक वह किसी और जैसा बनने की कोशिश नहीं करते – जो कि नामुमकिन है, क्योंकि दबाव में आप हमेशा वही बन जाते हैं जो आप असल में हैं – तब तक सब ठीक रहेगा. वह बहुत तेजी से इस लय में आ गए हैं.”

यूरोपियन टी20 प्रीमियर लीग में रॉटरडैम डॉकर्स के सह-मालिक रोड्स का मानना है कि 2027 क्रिकेट वर्ल्ड कप में खेलने वाली टीमों को अलग-अलग परिस्थितियों के अनुसार जल्दी खुद को ढालना होगा. यह टूर्नामेंट साउथ अफ्रीका, नामीबिया और जिम्बाब्वे की संयुक्त मेजबानी में होगा.

उन्होंने कहा कि समुद्र के किनारे खेले जाने वाले मैचों की परिस्थितियां जोहान्सबर्ग और प्रिटोरिया जैसे ऊंचाई वाले शहरों से काफी अलग होती हैं. इसलिए टीमों को हर जगह के हालात को समझकर अपनी रणनीति बनानी होगी. रोड्स ने यह भी कहा कि जैसे ईटीपीएल के जरिए यूरोप में क्रिकेट को बढ़ावा दिया जा रहा है, वैसे ही नामीबिया और जिम्बाब्वे जैसे देश भी वर्ल्ड कप की मेजबानी के जरिए क्रिकेट को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

जोंटी रोड्स ने कहा कि साउथ अफ्रीका की पिचें आमतौर पर बल्लेबाजी के लिए अच्छी होती हैं, इसलिए वहां बल्ले और गेंद के बीच बहुत ज्यादा संघर्ष नहीं देखने को मिलता. गेंद बल्ले पर अच्छी तरह आती है, जिससे बल्लेबाज अपने शॉट आसानी से खेल पाते हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय बल्लेबाज आधुनिक क्रिकेट के हिसाब से खुद को बहुत जल्दी ढाल चुके हैं. खास तौर पर वे रैंप और स्कूप जैसे नए जमाने के शॉट शानदार तरीके से खेलते हैं. भारतीय खिलाड़ी गेंद के करीब जाकर इन शॉट्स को काफी प्रभावी ढंग से अंजाम देते हैं, जो उनकी बड़ी ताकत है.

खेल के इतिहास के सबसे बेहतरीन फील्डरों में से एक माने जाने वाले रोड्स को 1992 के वर्ल्ड कप में इंजमाम-उल-हक को डाइव लगाकर रन-आउट करने के अपने मशहूर कारनामे से दुनिया भर में पहचान मिली. हालांकि, उन्होंने बताया कि उनकी सबसे प्यारी निजी याद एक साल बाद Mumbai में वेस्टइंडीज के खिलाफ ब्रेबोर्न स्टेडियम में खेले गए मैच की है.

“वर्ल्ड कप में उस रनआउट ने मेरे करियर की शुरुआत की. लोगों ने अचानक फील्डिंग पर ध्यान देना शुरू कर दिया. हालांकि, मुझे लगता है कि मैदान पर मेरे लिए सबसे शानदार दिन वह था जब हम 1993 में सीसीआई के ब्रेबोर्न स्टेडियम में हीरो कप खेल रहे थे. साउथ अफ्रीका वेस्टइंडीज के खिलाफ खेल रहा था और 20 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद थे. मैंने पांच कैच लिए, और बाद में मुझे पता चला कि यह फील्डिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड था. मुझे तो यह भी नहीं पता था कि फील्डिंग के लिए भी रिकॉर्ड होते हैं, यह बस कुछ ऐसा था जिसे करने में मुझे मजा आता था.”

एसएम/डीकेपी