
रांची, 1 सितंबर . Jharkhand लोक सेवा आयोग और Jharkhand कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के मामले में ब्लैकलिस्टेड परीक्षा संचालन एजेंसी वेबेल और आईसीएन का निदेशक मिथिलेश सिंह इस पूरे सिंडिकेट का मुख्य मास्टरमाइंड बनकर उभरा है.
सीआईडी की विशेष जांच टीम उसके पूरे वित्तीय और डिजिटल साम्राज्य के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है. फिलहाल वह Police गिरफ्त से बाहर है. उसकी तलाश में कई शहरों में टीमें भेजी गई हैं. परीक्षा घोटाले में गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों से सीआईडी की पूछताछ और शुरुआती जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि मिथिलेश सिंह ने जेएसएससी सीजीएल और अन्य प्रमुख परीक्षाओं में अभ्यर्थियों को पास कराने के एवज में प्रति परीक्षार्थी 12 लाख रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक की भारी-भरकम रकम वसूली थी.
इस नेटवर्क का खुलासा तब और पुख्ता हुआ जब मामले के एक अन्य गिरफ्तार मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने स्वयं, अपने भाई अक्षय तिवारी और अपनी पत्नी सुषमा कुमारी का चयन सुनिश्चित कराने के लिए मिथिलेश सिंह को 12-12 लाख रुपये यानी कुल 36 लाख रुपये की राशि दी थी. जांच में परीक्षा संचालन के दौरान अपनाई गई साठगांठ और डिजिटल सेंधमारी के बेहद गंभीर तरीके सामने आए हैं.
वेबल और आईसीएन जैसी ब्लैकलिस्टेड और संदिग्ध एजेंसियों को ओएमआर शीट की प्रोसेसिंग और प्रश्न-पत्र प्रिंट करने का संवेदनशील जिम्मा दिया गया था. दिल्ली से गिरफ्तार आईसीएन कर्मियों सुमांश प्रकाश और राहुल कुमार ने सीआईडी को बताया कि वे केवल निचले स्तर के निर्देशों पर काम कर रहे थे, जबकि जेएसएससी अधिकारियों और आयोग के साथ सभी मुख्य डीलिंग मिथिलेश सिंह खुद संभालता था. उसने परीक्षा पोर्टल के बैक-एंड सॉफ्टवेयर में अनधिकृत बदलाव करवाकर अभ्यर्थियों के अंकों के साथ हेरफेर की.
जांच एजेंसियों को जानकारी मिली है कि प्रश्न-पत्र लीक और धांधली से अर्जित काली कमाई के जरिए मिथिलेश ने देश भर में 300 करोड़ रुपये से अधिक की बेनामी संपत्ति खड़ी की है. सीआईडी की पड़ताल में दिल्ली, Patna, रांची, Mumbai , पुणे, Rajasthan और Haryana जैसे राज्यों में उसके नाम पर कई बेनामी जमीन, आलीशान मकान, फ्लैट, होटल और कमर्शियल संपत्तियों की जानकारी मिली है.
मूल रूप से बिहार के भोजपुर (आरा) जिले का रहने वाला मिथिलेश सिंह अंतरराज्यीय स्तर पर परीक्षा घोटालों का पुराना खिलाड़ी बताया जा रहा है. वह इससे पहले बिहार, पंजाब, Rajasthan और तेलंगाना में हुई परीक्षाओं में गड़बड़ियों और पेपर लीक मामलों में संलिप्त रहा है और करीब 4 बार जेल जा चुका है. उसने Jharkhand में भी दूसरे राज्यों के इसी संगठित सिंडिकेट मॉडल को लागू किया था.
–
एसएनसी/एसके
Skip to content