
New Delhi, 18 अक्टूबर . जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर में विजयादशमी उत्सव के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा पथ संचलन का आयोजन किया गया. इसे लेकर अब Political प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. इस आयोजन को लेकर पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं. जहां भाजपा इसे राष्ट्रवाद की जीत बता रही है, वहीं विपक्षी दल इसे शिक्षा के मंदिर में कट्टरता की एंट्री बता रहे हैं.
Lucknow में भाजपा के राज्यसभा सांसद प्रकाश पाल ने जेएनयू में आरएसएस के पथ संचलन का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि यह एक बहुत ही सकारात्मक और ऐतिहासिक संकेत है.
प्रकाश पाल ने कहा, “यह बहुत अच्छी बात है कि राष्ट्रवादी संगठनों ने पहली बार ऐसी जगह पर पथ संचलन किया है, जहां कभी ‘India तेरे टुकड़े होंगे, इंशाल्लाह-इंशाल्लाह’ जैसे देश विरोधी नारे लगाए जाते थे. जेएनयू की वही जमीन, जहां से कभी देश को तोड़ने की बातें उठती थीं, आज वहां राष्ट्रवाद का संचलन हो रहा है. यह बदलते India और बदलते जेएनयू का संकेत है.”
वहीं, आम आदमी पार्टी ने इस पूरे आयोजन पर तंज कसा है. दिल्ली से आप सांसद संजय सिंह ने कहा कि जब Government और Police का संरक्षण मिलता है तो कोई भी कार्यक्रम हो सकता है. संजय सिंह ने कहा, “जब Government सुरक्षा देती है, तो हर तरह के कार्यक्रम होते हैं. इसलिए वे भी अपना कार्यक्रम कर रहे हैं. उन्हें हर जगह Police और Government की सुरक्षा मिली हुई है. इसमें हैरानी की कोई बात नहीं है. सत्ता का साथ है तो मार्च तो निकलेगा ही.”
हैदराबाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वी. हनुमंत राव ने आरएसएस के इस पथ संचलन को खतरनाक करार दिया है. उन्होंने कहा, “पहले जेएनयू में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) संगठन काम करता था, अब वे सीधे आरएसएस के पथ संचलन और विजयादशमी उत्सव से जुड़ रहे हैं. यह वाकई बहुत खतरनाक स्थिति है.”
उन्होंने आगे कहा, “इससे कानून-व्यवस्था की गंभीर समस्या पैदा होगी. आरएसएस का मतलब ही कट्टरपंथी है. वे सिर्फ हिंदुओं को चाहते हैं, उन्हें मुसलमान, ईसाई या दूसरे समुदाय के लोग नहीं चाहिए. जेएनयू में इसकी शुरुआत हो रही है. इससे शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह खराब हो जाएगी और छात्र कभी भी कैंपस में हंगामा कर सकते हैं.”
–
पीआईएम/पीएम
Skip to content