
तिरुवनंतपुरम, 7 नवंबर . केरल में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने Saturday को Chief Minister वीडी सतीशन पर जीएनए बिजली खरीद समझौते को लेकर निशाना साधा.
पिनाराई विजयन ने Chief Minister वीडी सतीशन पर आरोप लगाया कि उन्होंने तय प्रक्रियाओं को दरकिनार किया और जीएनए के साथ बिजली खरीद समझौते को आगे बढ़ाने के लिए केएसईबी (केरल राज्य विद्युत बोर्ड) और विद्युत नियामक आयोग के फैसलों को अनदेखा किया.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस विवादित समझौते से जुड़े गंभीर सवालों का जवाब देने के बजाय, Chief Minister जांच से बचने के लिए भ्रम और अस्पष्टता पैदा कर रहे हैं.
विजयन ने कहा कि सतीशन ने खुद माना है कि उन्होंने अपने सामने रखी गई फाइल के आधार पर अंतिम फैसला लिया.
हालांकि, इससे यह सवाल उठता है कि Himachal Pradesh से बिजली खरीदने के केएसईबी के प्रस्ताव को क्यों दरकिनार कर दिया गया, जबकि उस प्रस्ताव की तकनीकी और वित्तीय जांच पूरी हो चुकी थी. उन्होंने कहा कि विभागीय मंत्री ने भी आधिकारिक स्तर पर चर्चा के बाद Himachal Pradesh से बिजली खरीदने के पक्ष में अपनी राय दर्ज की थी.
विजयन ने पूछा, “Chief Minister ने किस कानूनी या अन्य आधार पर जीएनए के प्रस्ताव को स्वीकार करने का फैसला लिया?”
उन्होंने यह भी जानना चाहा कि क्या केएसईबी ने Government को सूचित किया था कि जीएनए के प्रस्ताव से भारी वित्तीय नुकसान होगा, और क्या मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) ने इस पर कोई विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी थी.
विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि Chief Minister ने उचित प्रक्रिया का पालन करने के बजाय एकतरफा फैसला लिया, जिससे केएसईबी और बिजली उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ पड़ गया.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केएसईबी के तत्कालीन प्रबंध निदेशक राजामाणिकम के नोट से कुछ चुनिंदा पंक्तियों को उद्धृत करने भर से बोर्ड द्वारा जताई गई आपत्तियां खत्म हो सकती हैं?
उन्होंने पूछा कि अगर Government के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं था, तो पूरी फाइल और Government को मिला पत्र सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
विजयन ने यह भी स्पष्ट करने को कहा कि क्या राज्य विद्युत नियामक आयोग ने यह कहा था कि 1 नवंबर 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच ऊंची दरों पर बिजली खरीदने की कोई आवश्यकता नहीं है?
उन्होंने पूछा कि अगर आयोग के निष्कर्ष गलत थे, तो Government ने इस पर क्या कानूनी कार्रवाई की? उन्होंने यह भी जानना चाहा कि Chief Minister ने केएसईबी, रेगुलेटरी कमीशन और यहां तक कि विभागीय मंत्री की राय को दरकिनार करते हुए, सीधे तौर पर जीएनए समझौते को आगे बढ़ाने का फैसला क्यों किया.
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एएसएच/डीकेपी
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