जीआई टैग वाली कलबुर्गी तुअर दाल को मिला वैश्विक मंच, ‘मन की बात’ में जिक्र होने से कारोबारियों में उत्साह

कलबुर्गी, 26 अक्टूबर . कल्याण कर्नाटक क्षेत्र के कलबुर्गी जिले की पहचान अब स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रह गई है. यहां की प्रसिद्ध तुअर दाल, जिसे ‘तोगरी खानाजा’ यानी तुअर का खजाना भी कहा जाता है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही है. Prime Minister Narendra Modi ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में कलबुर्गी की तुअर दाल का उल्लेख करते हुए इसे स्थानीय उत्पादों के वैश्विक बाजार तक पहुंचने का उदाहरण बताया. इस दाल का मालदीव को निर्यात किया जा रहा है, जिससे स्थानीय दाल मिल कारोबारियों और उत्पादकों को भविष्य में कारोबार बढ़ने की उम्मीद है.

कर्नाटक का कलबुर्गी जिला तुअर दाल के उत्पादन के लिए जाना जाता है. यहां की तुअर दाल को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग भी प्राप्त है. स्थानीय स्तर पर इसकी गुणवत्ता और पोषण संबंधी विशेषताओं को इसकी प्रमुख पहचान माना जाता है. Prime Minister के ‘मन की बात’ में उल्लेख के बाद इस स्थानीय उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय पहचान और निर्यात की संभावनाओं को लेकर चर्चा बढ़ी है. कलबुर्गी की तुअर दाल की खासियत इसकी गुणवत्ता और पोषक तत्वों की मात्रा बताई जाती है. जानकारी के अनुसार, इसमें 18 से 23 प्रतिशत तक प्रोटीन पाया जाता है. क्षेत्र की जमीन में चूना पत्थर की मौजूदगी को यहां उगाई जाने वाली दाल की विशेषताओं से जोड़ा जाता है.

प्रति 100 ग्राम दाल में प्रोटीन 22.30 ग्राम, वसा 1.70 ग्राम, खनिज 3.50 ग्राम, कार्बोहाइड्रेट 57.60 ग्राम और ऊर्जा 335 किलो कैलोरी बताई गई है. इसमें कैल्शियम की मात्रा 73 मिलीग्राम है. स्थानीय कारोबारी इसे स्वाद और पोषण के लिहाज से विशेष गुणवत्ता वाली दाल मानते हैं. कलबुर्गी के अलावा बीदर, यादगीर, विjaipurा और कर्नाटक के अन्य जिलों में भी तुअर दाल की खेती की जाती है. इस उत्पादन से देश की दाल संबंधी जरूरतों को पूरा करने में योगदान मिलता है. स्थानीय दाल मिल कारोबारियों का मानना है कि अच्छी गुणवत्ता वाली दाल के उत्पादन को बढ़ावा देने से किसानों और कारोबारियों दोनों को लाभ हो सकता है.

दाल मिल एसोसिएशन के संचालक प्रतीश तापड़िया ने कहा कि गुलबर्गा की तुअर दाल दुनिया भर में प्रसिद्ध है और इसे जीआई टैग प्रमाणपत्र मिला हुआ है. उन्होंने जीआई टैग संख्या 353 का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां की दाल में पोटेशियम और कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है. बाजार में उपलब्ध सामान्य तुअर दाल की तुलना में कलबुर्गी की दाल की जांच रिपोर्ट में पोटेशियम और कैल्शियम की अच्छी मात्रा सामने आती है. इसका स्वाद अच्छा है और यह ऊर्जा बनाए रखने में भी सहायक मानी जाती है.

Prime Minister मोदी ने ‘मन की बात’ में बताया कि गुलबर्गा की तुअर दाल अब मालदीव भी निर्यात हो रही है. इस व्यवसाय में कई परिवारों की तीसरी और चौथी पीढ़ी भी शामिल हो चुकी है. यदि निर्यात के लिए उचित अवसर और कारोबार को पर्याप्त पहचान मिले, तो यहां से तुअर दाल का निर्यात काफी बढ़ सकता है.

प्रतीश तापड़िया ने केंद्र Government से तुअर दाल उद्योग को कृषि आधारित उद्योग की श्रेणी में शामिल करने की मांग की. उन्होंने कहा कि वर्तमान में तुअर दाल उद्योग को कृषि आधारित उद्योग के रूप में शामिल नहीं किया गया है. उनके मुताबिक ऐसा होने से किसानों और दाल मिल संचालकों, दोनों को लाभ मिल सकता है.

स्थानीय कारोबारियों का यह भी मानना है कि विदेशों से दाल के आयात को नियंत्रित करने और देश में अच्छी गुणवत्ता वाली दाल उगाने वाले किसानों को प्रोत्साहित करने की जरूरत है. इससे स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और दाल कारोबार से जुड़े लोगों के लिए नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

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